बिना खिड़की दरबाजे के कोई घर नहीं होता ऐसे ही बिना गुणों के कोई व्यक्ति नहीं होता” संभवसागर महाराज
विदिशा
“बिना खिड़की दरबाजे के कोई घर नहीं होता ऐसे ही बिना गुणों के कोई व्यक्ति नहीं होता” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने श्री शांतिनाथ दि. जैन मंदिर स्टेशन पर प्रातःप्रवचन सभा में व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य भद्रवाहु अंतिम श्रुतकेवली हुये तथा चंद्रगुप्त मोर्य जिनशासन की पताका फैराने वाले अंतिम शासक हुये जिन्होंने संयम को ग्रहण किया था मुनि श्री ने माता के सोलह स्वप्न के बारे में एक एक स्वपन की विस्तृत व्याख्या की एवं उसका फलादेश बताते हुये कहा कि वर्तमान समय में वह सभी बातें सत्य होते प्रतीत हो रही है,एक समय था जब चारों और जिन शासन की पताका फहराया करती थी, लेकिन आजकल उसका ह्रास होता नजर आ रहा है लोग अपनी संस्कृति को तो भूले ही है साथ ही साथ भारतीय संस्कृति को भी भूलते जा रहे है।
मुनिश्री ने कहा हम किसी भी व्यक्ति में कोई दोष न देखें सिर्फ उसके अंदर के गुण को देखें यदि हमने लोगों में गुणों को देखना प्रारंभ कर दिया तो आप सभी विवादों से बच जाएगे तथा आपस में प्रेम तथा सामंजस्य की वृद्धि होगी उन्होंने कहा कि आखरी में समाधि भक्ती में लिखा है कि “दोष वादे च मौनं” “जहा पर आपको दोष नजर आये वहा पर मौन हो जाए” तथा तत्वार्थसूत्र में भी लिखा है दूसरों की निंदा करने से नीच गौत्र का बंध होता है
मुनि श्री ने कहा कि यदि आप दूसरों की निंदा करोगे तो लोग भी आपकी निंदा करेंगे इससे आपस में कटुता होगी साथ ही अभी आपको दो पांव दिये है, फिर आपको चार पैर वाला बनना पड़ेगा अर्थात पशुगति का बंध होगा इसलिये क्या करो कि हम किसी भी व्यक्ति के अंदर कोई दोष न देखें सिर्फ उसके अंदर के गुण ही गुण देखें मुनि श्री ने सोलह स्वप्न का अंतिम स्वप्न का वर्णन करते हुये कहा कि माता को “काले हाथियों का झुंड नजर आया” का फल बताते हुये कहा कि आसमान में काले काले बादल तो छायेंगे लेकिन बारिश नहीं होगी अथवा असमय बारिश होगी जिससे फसल बरबाद होगी। इस प्रकार माता के सोलह स्वप्न का फल जो कि वर्तमान समय में सत्य नजर आ रहा है ध्यान रखना कि आने वाले समय में धर्म की ध्वजा युवाओं के कंधे पर ही होगी।
इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज मंच पर विराजमान थे प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री के प्रवचन प्रातः9 बजे से10 बजे तक चल रहे है इसके पूर्व 8:30 बजे से आचार्य श्री की संगीतमय पूजन विदिशा नगर की महिलामंडलों के द्वारा की जाती है तथा अंत में प्रवचनों पर आधारित प्रश्नमंच मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज द्वारा आयोजित होता है जिसका सही उत्तर दैने बाले भैया बहनों को समग्र पाठशाला समिति द्वारा पुरुषकृत किया जाता है कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






