राघौगढ़ को भगवान राम के नाम से जाना जाता है: मुनिश्री योग सागर महाराज

धर्म

राघौगढ़ को भगवान राम के नाम से जाना जाता है: मुनिश्री योग सागर महाराज
राघौगढ़
आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के गृहस्थ जीवन के भाई और ज्येष्ठ निर्यापक मुनिश्री योगसागर महाराज ने राघौगढ़ में धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, राघौगढ़ को भगवान श्रीरामके नाम से जाना जाता है। यह नगरधर्म नगरी है। यहां की जनता की संत सेवा और धर्म के प्रति रुचि सराहनीय है।

 

 

उन्होंने कहा, मोक्ष में विराजमान भगवान श्रीराम भी इस नग
नगरी की धर्म प्रभावना से प्रसन्न हो रहे होंगे। उन्होंने कहा
निर्लेप सागर की जन्मस्थली राघौगढ़ है। उन्होंने संसार के दुखों को जानकर मोक्ष मार्ग अपनायाऔर इस नगरी को गौरव दिलाया।

इस अवसर पर धर्म सभा में संघस्थ मुनिश्री निरोगसागर जी महाराज ने कहा, राघौगढ़ की जैन समाज ने श्री पारसनाथ
दिगंबर जैन मंदिर और संत सुधासागर धाम पर श्री संभवनाथ दिगंबर जैन मंदिर का गगनचुंबी निर्माण कर धर्म के प्रति समर्पण का। उदाहरण दिया है। उन्होंने बताया, पारसनाथ मंदिर में लगभग 800 वर्ष पुरानी अतिशयकारी प्रतिमाएं विराजमान हैं। इन पर प्रतिष्ठा का संवत भी दर्ज है।

राघौगढ़ राजाओं की नगरी रही है। उन्होंने आव्हान किया कि
श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधानऔर विश्व शांति महायज्ञ में सभी श्रद्धा से भाग लें। इस विधान के पुण्यार्जक मुनिश्री निर्लेप सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के परिवारजन हैं। उन्होंने कहा, विधान में भाग लेने वाले सभी को सिद्धभगवान की आराधना का पुण्य लाभ मिलेगा।

विधान के आरंभ में डॉ. अजित रावत और अनिल रावत ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।जैन समाज के अध्यक्ष सिंघई अशोक भारिल्य और समाजजनों ने मुनिसंघ को श्री फल भेंट कर शीतकालीन सानिध्य और वाचना का अनुरोध किया। धर्म सभा का संचालन विकास कुमार जैन ने
किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *