देवता ही नगरी को पवित्र और पावन बनाते हैं, आपको नगर में ऐसा करना है सुधासागर महाराज
अशोकनगर
दुर्लभ है महोत्सव रामराज लाने के लिए एक तो मजबूत बनना में पड़ेगा। श्री राम की तरह सोचना भी ऐसा पहले अपने मन को बनाओ कि इसके अंदर से मर्यादापुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी जैसे विचार हर हृदय में आना इतना आसान नहीं होता। पहले तो भावना वैसी बनना ही दुर्लभ है तब कहीं अयोध्या नगरी की कल्पना करो।
भगवान के आने से छः महीने पहले ही देवता अयोध्या नगरी को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देते हैं। जहां कोई दुखी दरिद्र नहीं से बचता। ऐसी पावन भूमि बनाने के लिए इसी भूमि में शक्ति जागती है हर दिल कोमल और निर्मल हो जाए। अयोध्या की रचना धनपति कुबेर करें। इसके पहले अपन सब मिलकर कुछ तैयारियां करें तो कोई बात है।


देवता तो हमेशा ही अयोध्या नगरी को पवित्र और पावन बनाते हैं। आपको अपने नगर में भी ऐसा करना है। उक्त धर्म उपदेश सुभाषगंज मैदान में चल रही धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
निस्वार्थ प्रेम करके देखो जीवन का आनंद समझ में आ जाएगा
मुनिश्री ने धर्मसभा में कहा कि मनुष्य इतना स्वार्थी हैं कि पेड़ देते-देते मिट जाता है इस मानव का स्वार्थ खत्म नहीं होता। हमारे संघ में महाराज क्षमासागर जी एक पेड़ की कहानी सुनाया करते थे। उनके आंसू निकल आते थे एक पेड़ के पास छोटे छोटे बच्चे खेला करते कभी पत्ते तोड़ते कभी कुछ करते तो बच्चों से पेड़ खुश हो जाया करता फिर बच्चों ने आना बंद कर दिया। पेड़ दुःखी हो गया। बच्चों से पूछा आते क्यों नहीं हो अब तुम सुख गये हमें क्या दोगे तो पेड़ बोला मेरे लकड़ी से किवाड़ फर्नीचर जो चाहे बनाओ ले जाओ मनुष्य तो स्वार्थी तेरे पास क्या बचा है। पेड़ बोला इस छूट से नाव बनाओ तुम नदी पर जहां चाहे चले जाओ। ऐसा ही हुआ वह मिटता गया ।
स्वार्थी मानव का स्वार्थ पूरा नहीं हुआ। आज कल जनरल प्रश्न हो गया आज बिना स्वार्थ के कोई करना नहीं चाहता हम से पूछते बच्चे इससे क्या मिलेगा। कभी-कभी दूसरे के काम आना निस्वार्थ प्रेम करके देखो। जीवन का आनंद समझ में आ जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


