देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पण भाव से जीवन में परिवर्तन लाकर जीवन को आलोकित करे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पण भाव से जीवन में परिवर्तन लाकर जीवन को आलोकित करे।
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर

साधु समागम से जीवन में परिवर्तन आना चाहिए जिसके जीवन में संत समागम से परिवर्तन आता है उसी के जीवन की सार्थकता होती है । वर्षा योग में संत सानिध्य में 5 माह तक आपको जीवन में परिवर्तन का सौभाग्य मिलेगा इस दौरान शिक्षण शिविर के माध्यम से आपके जीवन में विकृति को दूर करने के लिए प्रवचन माला चलाई जाएगी । यह मंगल धर्म देशना आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी ने बीसा हूमड़ धर्मशाला में चातुर्मास हेतु आगमन के अवसर पर प्रकट किए।

 

 

गज्जू भैया,राजेश पंचोलिया, पारस चितौड़ा अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि देव पूजा गुरु भक्ति संत समागम से जीवन में परिवर्तन होता है। अभी श्रावक के कर्तव्य के प्रति शून्यता हो रही है ।विगत दिनों युवा सम्मेलन ,महिला सम्मेलन ,प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन हुआ था। जीवन में कैसे परिवर्तन आए इस पर विशेष प्रवचन माला होगी। नदी पर्वत से निकलती है और सागर से मिलने पर सागर बन जाती है, यदि नदी मनमाने तरीके से बहती है तो वह सागर में नहीं मिलती सागर में मिलकर वह समर्पण करती है, इसी प्रकार आप को भी जीवन में देव शास्त्र गुरु संत समागम के प्रति समर्पण कर जीवन में परिवर्तन लाना चाहिए ।

 

प्रवचन में आचार्य श्री ने जीवन में परिवर्तन लाने हेतु महत्वपूर्ण सूत्र में बताया कि चातुर्मास में प्रत्येक माह प्रथक प्रथक संदेश देते हैं आषाढ़ माह में धर्म रूपी बाड़ लगाकर जीवन रूपी कल्पवृक्ष की रक्षा करें, सावन में संयम के साबुन से मन को परम पवित्र करें ,भादो में भगवान भक्ति के भाव से भगवान की भद्रता पाएं ,आश्विन आसोज माह में आलस्य छोड़कर आत्म तत्व को चिंतन कर जाने ,कार्तिक माह में कर्मठता पूर्वक श्रावक कर्तव्य का निर्वाह करें ।ऐसा करने से जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं।आपका जीवन हीरे जैसे बहुमूल्य है इसे तप संयम व्रत के माध्यम से और बहुमूल्य बनाने का प्रयास करें । देव शास्त्र गुरु की देशना को समझकर मनन चिंतन कर जीवन को आलोकित करें आपको पहनावे ,खानपान और समय के उपयोग पर ध्यान देना होगा।

शांतिलाल वेलावत सुरेश पद्मावत अनुसार 2 जुलाई को दोपहर 4 बजे से पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 55 वा वर्षायोग स्थापित करेगे।सूत्रों के अनुसार आचार्य श्री ने कुल 55 वर्षायोग में 31 चातुर्मास राजस्थान में, कर्नाटक में 09 स्थापित किए हैं सिद्ध क्षेत्र अतिशय में अभी तक 18 वर्षायोग संपन्न किए हैं। उदयपुर में वर्ष 2023 के पूर्व वर्ष 2002 में चातुर्मास किया था। उदयपुर नगर के 5 साधु , मुनि श्री चिन्मय सागर जी,मुनि श्री प्रशम सागर जी,मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी,आर्यिका श्री मुदित मति जी,आर्यिका श्री प्रणत मति भी आचार्य संघ के साथ चातुर्मास कर रहे है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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