पीपल्दा ग्राम अब श्री चंद्र प्रभु अतिशय मंदिर के नाम से भारत में विख्यात होगाजिन ,जिनालय मंदिर ,क्षेत्र में चमत्कार, अतिशय होता हैं वह मंदिर अतिशय क्षेत्र होता हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

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पीपल्दा ग्राम अब श्री चंद्र प्रभु अतिशय मंदिर के नाम से भारत में विख्यात होगाजिन ,जिनालय मंदिर ,क्षेत्र में चमत्कार, अतिशय होता हैं वह मंदिर अतिशय क्षेत्र होता हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

पीपल्दा (राजेश पंचोलिया इंदौर ) 2 दिसंबर

 पीपल्दा ग्राम अब श्री चंद्र प्रभु अतिशय मंदिर के नाम से भारत में विख्यात होगा। 972 वर्ष प्राचीन जिनालय में विगत 3 वर्षों पूर्व आए थे तब से अभी तक हमने भी अनेक अतिशय देखे ,और प्रभु की सकारात्मक उर्जा महसूस की। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी।अब ग्राम पीपल्दा नगर हो गया ।प्राचीन जिनालय पहले रोड से 4 फीट नीचे था, वर्षा का पानी मंदिर में आता था, प्रभु के चमत्कार से बिना निकासी के जल निकल जाता था ,श्री चंद्रप्रभु भगवान का पंचकल्याण प्रतिष्ठा संपन्न हुई है। इस दौरान इंदौर जैसे महानगर से भक्त यहां आकर सौधर्म इंद्र बने। कोलकाता, छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के श्रावको ने तन मन धन भक्ति उत्साह पूर्वक की जन्म कल्याणक पर हेलिकाप्टर से पुष्प वर्षा,तप कल्याणक पर प्रसिद्ध भामाशाह का हेलिकाप्टर से आना ,मंदिर बहुमंजिला शिखर वाला बनना, संत भवन बनाना,उसके लिए भूमिदान, निर्माण सामग्री का दान ऐसे अनेक चमत्कार अतिशय प्राचीन श्री चंद्र प्रभु द्वारा हुए हैं इसलिए श्री चंद्रप्रभु जिनालय को हम अतिशय क्षेत्र घोषित करते हैं। आपकी ही तरह श्री चन्द्रप्रभु भगवान भी संसारी प्राणी थे जिन्होंने मनुष्य भव में युवराज बन कर राज्यसंचालन किया विवाह भी किया आकाश में बिजली की चमक देखकर वैराग्य का निमित मिला यह मंगल देशना वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की।

गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि दीक्षा का प्रसंग आपने देखा।तप साधना से चार धातिया कर्मों को नष्ट कर केवल ज्ञान प्राप्त कर विहार कर धर्म देशना समवशरण में देते हैं। सम्मेद शिखर में नियोग धारण कर ध्यान से शेष 4अधातिया कर्मों को नष्ट कर सिद्ध अवस्था प्राप्त करते है। सभी को चमत्कारी अतिशय कारी चन्द्र प्रभु श्री का प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक , पूजन का संकल्प लेना चाहिए। देव गुरु हमारे आराध्य हैं । 2 दिसंबर को प्रातः श्री जी के अभिषेक पूजन के बाद आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि अरिहंत भगवान 4 कर्मों के बाद शेष 4 कर्म किस प्रकार श्रेणी बार क्षय कर सिद्धालय विराजित होते हैं। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव नख और केश के अग्नि संस्कार करते है ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में पंडाल से नूतन श्रीजी को प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के निर्देशन में रथ में विराजित कर नूतन मंदिर में नूतन बेदी पर मंत्रोच्चार पूर्वक पुण्यशाली परिवारों द्वारा विराजित कर नूतन शिखर पर स्वर्ण कलशारोहण मनोज ,संजीव गौरव सोगानी परिवार द्वारा किया गया ।ध्वजदण्ड श्रीमती आरती सनत निखिल विशालजैन इंदौर पुण्यार्जक परिवार द्वारा लगाए गए। मंदिर निर्माण समिति के प्रभारी लल्लू प्रसाद सिंघल, ओम प्रकाश ,राजेंद्र, ओमप्रकाश बजाज अनुसार कार्यक्रम के दौरान नूतन जिनालय नूतन प्रतिमाओं बेदी , शासन रक्षक देवी देवताओं,मंदिर ओर संत भवन निर्माण में तन, मन,और धन से सहयोग करने वाले सभी दाताओं और सहयोगियों का तिलक, माला, दुप्पटा, स्मृति चिन्ह से जैन समाज ओर सभी समाज के सेवाभावी का सम्मान कर कृतज्ञता ज्ञापित की। मोक्षकल्याण के पूर्व दिवस  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के 57 वर्ष के संयमी जीवन को दर्शाने वाली गौरव कथा नाटिका का मंचन स्थानीय कलाकारों ने किया जिसकी सभी लोगों ने प्रशंसा की

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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