धर्मसभा • बहादुरपुर के रामलीला मैदान में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा-खुद के साथ ही पड़ोसी भी सुखी रहे, तभी मनुष्य जन्म सार्थक, दूसरों को दुख देने वाले पशु योनि में जाते हैं
अशोकनगर
मेरा काम बने और दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं, – यह सोच समाज के लिए सबसे घातक है। सौभाग्य मैं से आप महापुरुषों की कर्मभूमि भारत में जन्मे हैं, जहां हमारी संस्कृति भूखे जरूर उठती है, लेकिन किसी को पेट भरे बिना सुलाती नहीं है। खुद के न सुखी होने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके साथ न यह भावना भी जोड़ो कि मेरे साथ दूसरा भी सुखी रहे। यह ओजस्वी विचार मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने बहादुरपुर के रामलीला मैदान में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
इस दौरान अशोकनगर जैन समाज के सैकड़ों । श्रद्धालुओं ने मुनि श्री की आहार चर्या के बाद सामूहिक महापूजन किया और श्रीफल भेंट कर उन्हें अशोकनगर नगर आगमन हेतु निवेदन किया।
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मुनि श्री ने कड़े शब्दों में कहा कि जो दूसरों को दुखी करके अपने और अपने परिवार के लिए सुख चाहते हैं, वे कभी सुखी नहीं हो सकते। अपनों से प्यार करना तो पशुओं का लक्षण है। अगर यही सोच इंसानों में दिखे, तो मृत्यु के बाद पशु योनि (तिर्यंच पर्याय) तय है। जो व्यक्ति अपने खून के रिश्ते से ऊपर उठकर अपने पड़ोसी, मोहल्ले और नगर के सुख की कामना करता है, वह जीते जी देवता है और मरकर देव पर्याय को प्राप्त करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
