श्रीमद 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान का 5 दिवसीय पंच कल्याणक श्री जी की रथ यात्रा आचार्य संघ सानिध्य में घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप उदघाटन कलश स्थापना, याग़ से प्रारंभपंचकल्याणक प्रतिष्ठा से जीवन में संस्कारों का आरोपण करे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
श्रीमद 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान का 5 दिवसीय पंच कल्याणक श्री जी की रथ यात्रा आचार्य संघ सानिध्य में घटयात्रा, ध्वजारोहण, मंडप उदघाटन कलश स्थापना, याग़ से प्रारंभ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने किए केशलोचन , देवता रत्नों की तीर्थंकर धर्म की वृष्टि करते है।29 को होगा जन्म कल्याणक हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प पृष्टि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से जीवन में संस्कारों का आरोपण करे।
पीपलदा 28 नवंबर( राजेश पंचोलिया इंदौर)
श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक के प्रथम दिन वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में दिनांक 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक चलने वाले 5 दिवसीय 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान का पंचकल्याणक का शुभारंभ राजकीय अतिथि पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में श्रीजी की रथयात्रा, में सौधर्मइन्द्र श्री समर ,श्रीमति पूर्वा कंठाली और ध्वजारोहण परिवार हाथी पर सवार रहे।। शताधिक महिलाओं की विशाल घटयात्रा नवीन जिनालय से प्रारंभ होकर जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ समापन कार्यक्रम स्थल चन्द्रपूरी के वर्धमान सभागृह में हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि चंद्रपूरी में चंद्रनाथ तीर्थंकर बालक ने जन्म लेकर, वैराग्य दीक्षा तप साधना से परमात्म पद को जानने का आदर्श कार्य कर परमात्मा बनने का पुरुषार्थ किया।नगर में मंदिर जिनालय बनने से नगर उन्नतिशील होता हैं भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन आदि क्रियाओं से जीवन मंगलमय होकर जीवन में उन्नति होती है 15 माह तक देवता रत्नों की वृष्टि करते हैं तीर्थंकर महामुनिराज धर्म की वृष्टि उपदेश देशना से करते हैं ।3 वर्षों में नूतन मंदिर निर्मित हो गया। आचार्य श्री ने कहा कि देव शास्त्र गुरुओं के सेवा भावियो का सम्मान करना भारतीय संस्कृति हैं। पंच कल्याणक के संस्कार क्रिया से जीवन का निर्वाण का पुरुषार्थ कर जीवन का निर्माण करे।
राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के प्रवचन के पूर्व शिष्य मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में पाषाण, रत्न ,धातु की प्रतिमा में प्रतिष्ठाचार्य के सहयोग से आचार्य मुनिराज मंत्रोच्चार से सूरीमंत्र से प्रतिमाओं में भगवान के गुणों का आरोपण कर प्रतिमाओं कोपूजनीय,वंदनीय बनाया जाता है।मुनि श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा देखने के साथ सीखने का महोत्सव है किस प्रकार पाषाण को पूजनीय बनाया जाता है।पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से भगवान जैसा बनने का पुरुषार्थ करें यह भाव जागृत करें कि हम भी किसी भव में तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध करें ।
आज प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने केश लोचन किए। आज आचार्य श्री का उपवास रहा ।समाज अध्यक्ष बजरंग लाल एवं मनोज जैन सोगानी अनुसार आचार्य श्री प्रवचन के पूर्व ध्वजारोहण श्रेष्ठी श्री सन्मति, कमलेश देवी, सुकुमाल, महिपाल, मोहित चवरिया परिवार ने , मंडप उद्घाटन श्री राजेंद्र दिलीप अंकित अमित निवाई ने ,मुख्य मंगल कलश स्थापना श्री मनोज जैन सोगानी परिवार ने की। आचार्य श्री संघ के मंचासिन होने के बाद मंगलाचरण के द्वारा कर श्रीजी और प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी सहित परम्परा के सभी आचार्यों के चित्र का अनावरण महावीर, शिखरचंद,सुरेश,अशोक परिवार निवाई तथा दीप प्रवज्जलन श्री कैलाश चंद चोरू परिवार द्वारा किया गया। श्री जी के अभिषेक बाद आचार्य श्री सानिध्य में संघ के सेवाभावी बाल ब्रह्मचारी गज्जूभैया, पदम भैया, सोनू भैया, परमीत, पारस पाटनी, बाबूलाल शाह,लोकेश गजराज , फूल सिंह , सनत जैन का तिलक ,श्रीफल,माला पगड़ी से सम्मान किया गया।मंदिर के शिल्पकार, वास्तुविद प्रतिमाधारी इंजीनियर पारसमल उदयपुर का सम्मान किया गया। वात्सल्य वारिधी सोशल मीडिया के राष्ट्रीय प्रभारी राजेश पंचोलिया इंदौर का सभी प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रानिक ओर प्रिंट मीडिया पर त्वरित प्रसारण प्रचार प्रसार के लिए सम्मान किया गया।आचार्य ओर प्रतिष्ठाचार्य निमंत्रण द्वारा प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री, सहित सभी विद्वानों का बहुमान किया।आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भेट की गई । पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोज सोगानी अनुसार दोपहर को सौधर्म इंद्र ,शचि इंद्राणी, माता पिता प्रमुख इन्द्र, प्रति इंद्र सहित सभी का मंत्रोच्चार से सकलीकरण किया गया। इसके बाद याग़मंडल की पूजन प्रतिष्ठाचार्य श्री मनोज शास्त्री के निर्देशन में हुई। शाम को श्री जी ओर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की भव्य मंगल आरती पश्चात रात्रि में भगवान की माता को रात्रि में आए 16 सपनों का नाटकीय मंचन किया गया। 29 नवंबर को तीर्थंकर बालक का जन्म होगा। तीर्थंकर बालक का 1008 कलशों से अभिषेक होगा।सवाई माधोपुर सहित राजस्थान के अनेक नगरों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। सौधर्म इंद्र समर कँठाली द्वारा हेलिकॉप्टर से पुष्प वृष्टि होगी जो आकर्षण का केंद्र रहेगा
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





