जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं- मुनि प्रणीत सागर जी निवाई में 26 दिगम्बर जैन संत कर रहे हैं आत्म कल्याण के लिए प्रतिक्रमण 

धर्म

जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं- मुनि प्रणीत सागर जी निवाई में 26 दिगम्बर जैन संत कर रहे हैं आत्म कल्याण के लिए प्रतिक्रमण 

निवाई – सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई के तत्वावधान में वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर महाराज संध के 26 दिगम्बर जैन संत निवाई में शीतकालीन प्रवास हेतु संत निवास नसियां जैन मंदिर में विराजमान हैं जहां प्रतिदिन विश्व में शांति की कामना को लेकर स्वाध्याय एवं प्रतिक्रमण कर रहे हैं। शुक्रवार को सुबह नसियां जैन मंदिर पर जैन मुनि प्रणीत सागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से पर के प्रति जो कार्य किया जाता है वह परोपकार है। आत्मा के प्रति या आत्मा के समीप आने के लिए जो हमारा कार्य है वह परोपकार है।

 

 

 

धर्म सभा में आर्यिका समर्पित मति माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। आर्यिका माताजी ने सम्यग दर्शन के 8 अंग की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्राणी आहार – विहार, रुप रंग, चाल ढाल तथा नाक नक्शे की भिन्नता के साथ साथ उसकी भावनाओं में भी वैषम्य पाया जाता है। जितने प्राणी है उनकी उतनी विचार धाराएं हैं। उन्होंने कहा कि किसी का दायरा अपने परिवार तक सीमित है तो किसी की दृष्टि समाज व देशव्यापी है। किसी की विचार धाराएं स्वार्थों से ग्रसित है तो कोई परोपकारमय जीवन व्यतीत कर रहा है। जो धर्म और संस्कृति की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करता है उसका अंत सुखद होता है उसे भविष्य में पश्चाताप नहीं करना पड़ता इसके विपरित जो कुछ स्वार्थ वासना कषाय या तेरे मेरे की विचारधाराओं का ग्रास बन जाता है उसका अंत दुखद होता है। और वह पश्चाताप की अग्नि में झुलसता रहता है। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं सुनील भाणजा ने बताया कि धर्म सभा से पूर्व भगवान शांतिनाथ जी के समक्ष दीप प्रज्वलित महावीर प्रसाद पराणा, विष्णु बोहरा जितेन्द्र चंवरिया, त्रिलोक हरभगतपुरा शंभु कठमाणा विमल पाटनी एवं अधिवक्ता रवि भाणजा ने किया इसके साथ ही मंगलाचरण मीनाक्षी भाणजा ने किया। नसियां जैन मंदिर में भगवान शांतिनाथ जी के समक्ष श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इस अवसर पर वर्धमान सागर चालीसा पाठ का पठन पाठन किया गया। प्रश्न मंच कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें विमल गिन्दोडी एवं ज्ञानचंद चंवरिया ने पुरस्कार दिया। इस दौरान गोपाल कठमाणा नीरज माधोराजपुरा पारसमल पराणा, राजेन्द्र जैन, राकेश संधी, विमल सोगानी, आशीष जैन, राहुल बोहरा, शिवलाल चौधरी, सुनील जैन, विमल जैन त्रिलोक रजवास अनिल जैन ज्ञानचंद झिलाय सहित अनेक लोग मौजूद थे।

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