परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी का धर्म नगरी नैनवा में हुआ भव्य मंगल प्रवेश*
*साधुओ को आहार दान देने से, तथा साधु सेवा करने से 21 भव का कर्म नष्ट होता है आर्यिका विज्ञा श्री*
जयपुर/

आचार्य 108 विराग सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी स संघ का आज नैनवा में भव्य मंगल प्रवेश हुआ जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि मंगल प्रवेश पर जैन समाज ने कस्बे की सीमा पर बैंड बाजों से आर्यिका संघ की भव्य अगवानी की सारे भक्तो ने मिलकर पूज्य गुरु मां का पदाप्रक्षालन व मंगल आरती के बाद आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में ठहराया इससे पूर्व आदिनाथ संस्कार पाठशाला के बच्चो ने मिलकर जैन गीतों की धुन पर बाजे बजाकर जैन धर्म के नारों के साथ भगवान महावीर का जयधोष किया

कार्यक्रम में आर्यिका श्री ने अपने मंगलमय प्रवचन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज आपका पवित्र वस्तु के साथ मिलन हुआ है तो आपका जीवन भी पवित्र बने , जैसे डिब्बी भले ही लोहे की हो पर उसमे अगर सोना रखते हो तो वो भी सोने की डिब्बी कहलाती है , बाजार में इत्र खरीदें या ना खरीदो अगर पास में जाते हो तो खुशबू अपने आप ही आती है वैसे ही साधुओ से आप का मिलन हुआ आपका जीवन भी मंगलमय हुआ साधु के दर्शन मात्र से एक एक समय में 7 भव के कर्म नष्ट होते हैं उनके साथ उठने बैठने से 14 भव का कर्म नष्ट होते हैं आहार दान या सेवा आदि करने से 21 भव का कर्म नष्ट होता है और उनके प्रवचन को सुनकर एक अक्षर को अपने जीवन मैं उतारने से 28 भव का कर्म प्रति समय नष्ट होता है श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर नैनवा में पूज्य गुरु मां विराजमान है आप सभी पधार कर धर्म लाभ ले।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
