ब्रह्मचारी सुमन दीदी बनी आर्यिका विवर्णमति माताजी गणिनी गुरु मा विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से हुई दीक्षा 

धर्म

ब्रह्मचारी सुमन दीदी बनी आर्यिका विवर्णमति माताजी गणिनी गुरु मा विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से हुई दीक्षा 

    सवाईमाधोपुर 

  परम पूज्य भारत गौरव गणिनी गुरु मा 105 विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से चमत्कार जी अतिशय क्षेत्र पर एटा नगर गौरव सुमन दीदी को दीक्षा के संस्कार करते हुए आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई

 

दोपहर की बेला में शुरू हुए दीक्षा समारोह में दीक्षार्थी सुमन दीदी को डोली बिठाकर बैंड बाजे के साथ दीक्षा स्थल पर लाया गया जहा चौक पुराया गया।

 

 

 

 

   दीक्षार्थी नेहा दीदी का भावुक उद्बोधन एवम दीक्षा हेतु निवेदन 

      दीक्षार्थी नेहा दीदी ने सर्वप्रथम सभी से क्षमा याचना करते हुए सभी उपस्थित जन समुदाय एवं गुरु मां के चरणों में दीक्षा प्रदान करने हेतु अनुमति मांगी उन्होंने कहा की वर्षों से मेरी इच्छा रही है कि मैं जैनेश्वरी दीक्षा लेकर समाधि मरण को प्राप्त करूं। सभी बैठी हुई संघ की बहने एवं जितने भी परिवार जिनसे मेरा संबंध हुआ हो जिनसे मेरा नाता रहा हो मैं सभी से क्षमा याचना करती हूं। अंत में उन्होंने कहा माताजी मुझे दीक्षा प्रदान करें।

 

गणिनी गुरुमा विशुद्धमति माताजी ने कहा कि अभी भी समय है सोच लो सुमन दीदी के शब्द थे कि माताजी अब कोई संसार से राग नहीं है इस संसार मोह माया को त्याग कर में अब त्याग की ओर बढना चाहती हूं आप दीक्षा प्रदान करें तीन बार माताजी ने उनसे पूछा लेकिन दीदी अपने निर्णय से नहीं हटी और दृढ़ता के साथ संयम के मार्ग पर बढ़ने की अनुमति मांगती रही इसके उपरांत गुरु मा ने उपस्थित समुदाय क्षेत्र कमेटी से भी स्वीकृति मांगी सभी ने एक स्वर से दीक्षा देने की स्वीकृति प्रदान की।

 

 

     कैशलोच का दृश्य द्रवित 

परम पूज्य गुरु मा ने दीक्षा के संस्कार करते हुए भक्ति पड़ी और भक्ति उपरांत बिना किसी औजार के हाथों से केशो का लोचन हुआ जब यह दृश्य भक्त देख रहे थे समुदाय देख रहा था सभी की आंखें द्रवित थी दीक्षा के संस्कार में सर्वप्रथम केशलोच होना आवश्यक होता है केशलोच एक तपस्या साधना है जो पंचम युग में केवल दिगंबर साधक ही कर सकता है। दीक्षा के क्रम में सभी उत्कृष्ट सेवाएं देने वालों एवं पुण्यशाली परिवारों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया कार्यक्रम का संचालन आशीष भया पुण्यांश ने किया केशो को झेलने वाले परिवारों ने केशो को झेला एवं पुण्यशाली परिवारों ने दीक्षार्थी दीदी को पिच्छिका, कमंडल,शास्त्र, माला एवं शास्त्र भेंट किए। दीक्षा के संस्कार करते हुए गुरु मा ने हाथ में श्रीफल देकर मस्तक पर श्रीकर स्वास्तिक लेखन कर दीक्षा के संस्कार किए।

   इस अवसर पर प्रज्ञा पद्मनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने कहा कि आप लोग दीक्षा समारोह में आए हैं कम से कम त्याग तो करके जाइए कि हम शैंपू नहीं लगाएंगे। एक और ऐसा भेद विज्ञान जो आप देख रहे जो अपने बालों को बिना किसी औजार के घास फूस की तरफ फेंक जा रहा हो दूसरी ओर बालों को शैंपू से चमकीला बनाया जा रहा हो उन्होंने कहा आप बनिया लेकिन याद रखना मैं भी पक्की बनिया की बिटिया हो, जिन चमकीले बालों से हम जुल्फों को हिलाते हुए चलते हैं, एक दिन ऐसा आएगा कि आपको भी खरगोश की पर्याय मिलेगी। 

 

 

    उन्होंने कहा है कि हमारी आंखे इसलिए कमजोर है कि हमने जीवो पर दया नहीं की आज जो दीक्षा दिवस में आए हैं और जो लाइव टेलीकास्ट देख रहे हैं मैं उन सभी से कहना चाहती हूं कि आज सबको अपनी पूरी जिंदगी के लिए शैंपू का त्याग कर देना चाहिए। 

 

  जैसे ही गुरु मा विशुद्धमति माताजी के श्रीमुख से दीक्षार्थी दीदी सुमन दीदी का दीक्षा के पूर्ण संस्कार के बाद नामकरण करते हुए नया नाम घोषित किया आर्यिका 105विवर्णमति माताजी सारा पंडाल आर्यिका 105विवर्णमति माताजी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा इस आयोजन में दूर दराज के भक्त सम्मिलित हुए।

 

     अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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