पूर्णमति माताजी का मानतुंग गिरी में हुआ मंगल प्रवेश हमें अपनी आत्मा का कल्याण करना है पूर्णमति माताजी

धर्म

पूर्णमति माताजी का मानतुंग गिरी में हुआ मंगल प्रवेश
हमें अपनी आत्मा का कल्याण करना है पूर्णमति माताजी
धार
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या स्वर कोकिला आर्यिका 105 पूर्णमति माताजी का शहर के मानतुंगगिरी क्षेत्र पर मंगल आगमन हुआ। मानतुंगगिरी क्षेत्र प्रबंध समिति ने माताजी संध की भावभीनी आगबनी की।
माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपनी आत्मा का कल्याण करना है। और अपने जीवन को धार्मिक संस्कार देकर जीवन को सफल बनाना चाहिए। पूज्य माताजी ने श्रद्धा का महत्व बताया इसका महत्व बताते हुए माताजी ने कहा कि केवल पूजा पाठ करने से भक्ति करने से धर्म नहीं होता है, इसके लिए अपने मन में श्रद्धा के भाव होना चाहिए। आगे बोलते हुए माताजी ने कहा कि भक्तामर महाकाव्य जैन धर्म के लिए नहीं अपितु सभी धर्मों के लिए एक महत्वपूर्ण काव्य है। इसका भोजन करने से मानव अपने हर संकट को दूर कर सकता है। हमें भक्तामर पाठ प्रतिदिन वाचन करना चाहिए।

क्षेत्रवासियों की तारीफ करते हुए माताजी ने कहा कि धार वासियों ने यहां पर भक्तामर तीर्थ की स्थापना कर पूरे भारतवर्ष के लिए एक अभूतपूर्व कार्य किया है। जो एक स्मारक के रूप में जाना जाता है। धार में ही मानतुंग आचार्य ने ही भक्तामर महाकाव्य की रचना की थी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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