मित्रता भावुकता से नहीं भाव से करना चाहिए आदित्य सागर महाराज
कोटा
रिद्धि सिद्धि नगर स्थित जैन मंदिर में चतुर्मासरत श्रुतसंवेगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि इस संसार में मित्रता केवल मिलनसार व्यक्ति की ही होती है। मित्रता भावुकता में नहीं भाव से करनी चाहिए। जिसके भाव वह स्वभाव खराब है, उसके मित्र नहीं है। सबसे अच्छा मित्र गुरु होता है जो सही मार्ग पर ले जाता है।
महाराज श्री ने कहा कि जो पीठ में छुरा घोप दे , ऐसे दोस्त ना अपनाओ। जो अहित से रोके, हित कार्यों में लगाए, और कठिन समय में साथ दे वही सच्चा मित्र है।



रविवार की बेला में मंदिर परिसर में भक्तामर विधान का आयोजन किया गया इसके साथ ही मूलनायक चंद्रप्रभु भगवान की वेदी को रजतमय बनाने की घोषणा की गई। जिसके लिए भामाशाहों ने 50 किलो चांदी दान की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
