जहा जहा शांति हो वहां धर्म हो यह जरूरी नहीं लेकिन जहां-जहां धर्म होगा वहां-वहां शांति अवश्य होगी नियमसागर महाराज
विदिशा
जहा जहा शांति हो वहां धर्म हो यह जरूरी नहीं लेकिन जहां-जहां धर्म होगा वहां-वहां शांति अवश्य होगी
” यह निश्चित है,”हिंसा कभी भी शस्त्र से अथवा आकुल व्याकुल परिणामों से नही रूक सकती, लेकिन जंहा धर्म होगा वंहा पर शांति अवश्य आएगी” इसलिये सम्यकज्ञान का प्रचार प्रसार अवश्य होंना चाहिये”
उपरोक्त उदगार निर्यापक मुनि श्री नियमसागर जी महाराज ने शीतलधाम विदिशा में प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि शस्त्रों से शांति नहीं होती आध्यात्म ही एक ऐसी शरण है जिसमें प्रत्येक देश,प्रत्येक नगर प्रत्येक तहसील प्रत्येक घर में प्रत्येक जीव और प्रत्येक मानव को आध्यात्म समझना होगा भगवान महावीर ने कहा “जिओ ओर जीने दो यह एकआध्यात्मिक संदेश हेऔर इसी मार्ग से विश्व का कल्याण संभव है” उन्होंने कहा कि अविवेक आकुलता, जल्दबाजी में जितने भी कार्य किये जाते है वह समस्या को घटाते नहीं वल्कि बढ़ाते ही है उन्होंने जीवन व्यवहार की बात बताते हुये कहा किसी भी कार्य की सिद्धी अनुशासन से हे,यदि अनुशासन आपके जीवन में नहीं है तो सारे जीवन व्यवहार के कार्य बिगड़ेंगे उन्होंने कहा कि कोई भी बात बोलने से पहले उसको तोलो,उसे एकदम मत बोलो,उसमें नम्रता का रस घोलो तो मोक्षमार्ग सरल हो जाएगा।








मुनि श्री ने कहा कि मोक्षमार्ग एकांतवादी नहीं है “मै ही सही हुं” यह कहना जल्दबाजी होगी उन्होंने कहा कि अशांति का जन्म आकुलता के कारण होता है,आजकल असत्य का बहुमत है इसलिये सत्य छिपकर रोता है ऐसे प्रश्न खड़े होते है। सहनशीलता नहीं होंने से उदवेगता आती है जीवन में सबसे बड़ा पुरुषार्थ व्यक्ति का सहनशील होंना ही है। यदि वह सहनशील हो गया तो धर्म उसके अंदर प्रवेश कर जाएगा
जैसे स्वाति नक्षत्र की एक जल की बूंद मोती बन जाती है। मुनि श्री के प्रवचन8:30 से चल रहे है। उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन ने दी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
