संयम उपकरण पीछी जिन मुद्रा और अहिंसा करुणा का प्रतीक हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जीआचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पीछी का सौभाग्य श्री धर्मेंद्र कल्लू पासरोटिया टोंक को मिला

धर्म

संयम उपकरण पीछी जिन मुद्रा और अहिंसा करुणा का प्रतीक हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जीआचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पीछी का सौभाग्य श्री धर्मेंद्र कल्लू पासरोटिया टोंक को मिला

टोंक

दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पीछी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है, पीछी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ है इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते । इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पीछी का परिवर्तन करते हैं, आचार्य श्री ने पीछी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है ,पसीना ग्रहण नहीं करती ,सुकुमार झुकने वाली होती है ।यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता ।सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होतीआज पीछी कमंडल रूपी संयम रथ निरंतर चल रहा है,इसका श्रेय प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज को है । यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी ने 34 साधुओं के पीछी परिवर्तन समारोह के अवसर पर अतिशय क्षेत्र टोंक के श्री आदिनाथ जिनालय परिसर की महती धर्म सभा में प्रगट की । गुरु भक्त राजेश पंचोलिया कमल सराफ अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि जिन्होंने साधुओं को संयम उपकरण पीछी देकर अनुमोदना की है, उन्होंने पुण्य का अर्जन किया है मयूर पीछी से कोमल वस्तु संसार में नहीं है इस महोत्सव को आपने आंखों से देखा है साधु एक वर्ष में मयूर पीछी से सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवो की रक्षा करते हैं ,अहिंसा महाव्रत के परिपालन का अन्य कोई उदाहरण देखने में नहीं आता है आचार्य श्री संघ में सभी 34 साधुओं की पुरानी पीछी नियमों व्रत के आधार पर पुण्यशाली परिवारों को दी गई। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व समाधिस्थ संयम साधना में सलग्न 72 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सल मति माताजी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी से लेकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद कर आचार्य श्री सभी मुनिराज सभी आर्यिका माताजी समाज परिजनों से क्षमा भाव धारण कर क्षमा याचना की आपका उपदेश सुनकर सभी के नेत्र सजल हो गए ।आर्यिका श्री महायश मति जी की नई पीछी आचार्य को देकर आचार्य श्री ने पुरानी पीछी गृहस्थ अवस्था के माता पिता श्रीमती संगीता राजेश पंचोलिया इंदौर , एवं श्रीमती आरती श्री सनत जैन इंदौर ने प्राप्त किया।मुनि श्री मुनि श्री चिंतन सागर जी की पीछी गजराज लोकेश कल्ली परिवार को प्राप्त हुआ मुनि श्री हितेंद्रसागर जी की पुरानी पीछी का सौभाग्य श्रीमती सोनू , श्रीमती नीतू छामुनिया टोंक परिवार को तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पुरानी पीछी का सौभाग्य को श्री धर्मेंद्र कल्लू पासरोटिया टोंक को प्राप्त हुआ।आज के दिन कार्तिक सुदी त्रयोदशी को 1008 श्री शांतिनाथ भगवान सहित 23 भगवान भूगर्भ से प्रगट हुए इस उपलक्ष्य में श्री शांति नाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आदर्श नगर में आहार चर्या के बादआचार्य श्री वर्धमान सागर का श्री पार्श्वनाथ जिनालय आदर्श नगर से नवीन 34 पीछी सहित जुलूस आदिनाथ जिनालय नसिया के लिए प्रस्थान किया आदर्श नगर समाज ओर चौका आहार व्यवस्था वाले नई पीछी मस्तक पर धारण कर चल रहे थे। सर्व प्रथम आस्था और जिया ने श्री ओर पूर्वाचार्यों के चित्र समक्ष चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्जलन किया। श्रीमती नीलम जैन ग्रुप ने 24 भगवान स्तुति का नृत्य मंगलाचरण किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन निहालचंद जी बैंगलोर ने परिवार सहित ओर जिनवाणी श्री राजेश पारस संजय प्रवीण पंड्या परिवारकिशनगढ़ ने भेंट कर आशीर्वाद प्राप्तकिया। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती सरोज जिला प्रमुख टोंक ने जिला प्रशासन का पत्रजिसमें जखीरा से राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर मार्ग करने की स्वीकृति पत्र आचार्य श्री हस्त में दिया ।हजारों जन समुदाय ने घोषणा का करतल ध्वनि से स्वागत किया। मंच संचालन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं कार्यक्रम संचालन पंडित मनोज शास्त्री ने किया

      राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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