संसार रूपी दलदल से मुक्ति तभी संभव,जब हम गुरु का हाथ थामें : प्रज्ञा सागर
कोटा |
आचार्य श्री 108प्रज्ञासागर महाराज ने सोमवार संध्या वंदन में
अपने प्रवचनों के माध्यम से संसार के मोहऔर कर्मों की जटिलता के बारे में बताया।आचार्यश्री ने कहा कि अनादि कर्मोंको बदलना अत्यंत कठिन है, क्योंकि गांठलगाना आसान होता है, पर उसे खोलना
कठिन ।
उन्होंने कहा कर्म और संसार की गांठें लाखप्रयत्नों के बाद भी नहीं खुलतीं, इन्हेंकेवल तपस्या और ध्यान की अग्नि से ही भस्म किया जा सकता है। गुरुदेव ने संसार की तुलना दलदल से करते हुए
कहा कि संसार का स्वभाव ही उलझना है। जैसे दलदल में फंसा व्यक्ति जितना बाहर निकलने की कोशिश करता है,उतना ही गहराई में धंसता चला जाता है।
दलदल में फंसे हाथी का उदाहरण देतेहुए कहा कि मनुष्य भी संसार रूपी दलदल में फंसा हाथी है, जो प्रयास केबजाय केवल चिंघाड़ता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
