प्रदेश भर से आए श्रद्धालु,पिच्छिका परिवर्तन में उमड़ा जन समूह ससंघ का 34 पिच्छिका का परिवर्तन हुआ

धर्म

प्रदेश भर से आए श्रद्धालु,पिच्छिका परिवर्तन में उमड़ा जन समूह ससंघ का 34 पिच्छिका का परिवर्तन हुआ

टोंक

श्री दिगंबर जैन नसिया में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का 34 पिच्छिका परिवर्तन का आयोजन सोमवार अनेक धार्मिक कार्यक्रम के साथ आयोजित हुआसमाज के प्रवक्ता पवन कंटान विकास जागीरदार ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का ससंघ आदर्श नगर जैन मंदिर से विहार कर बैंड बाजे के साथ श्रद्धालु 34 पिच्छिका अपने सिर पर के ऊपर सुशोभित करते हुए चल रहे थे और बड़े भक्ति भाव से नाचते गाते चल रहे थे इसके पश्चात आचार्य श्री आगमन जैन नसिया ने हुआ जहां पर महिला मंडल द्वारा रंगोली सिर मंगल कलश स्थापित करते स्वागत किया तत्पश्चात आचार्य वर्धमान सागर वर्षायोग समिति के द्वारा पाद प्रक्षालन चांदी के कलश से किया तत्पश्चात आचार्य श्री के ससंघ का पांडाल में मंचासीन हुए कार्यक्रम विधिवत शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित और चित्र अनावरण आस्था जैन बोरदा, किया नीलम हेमा, रिंकी ग्रुप के द्वारा मंगला चरण के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम शुरू हुआ

पाद प्रक्षालन का श्रेष्ठी निहाल चंद बंगलौर, शास्त्र भेंट पारस मल राजेश पांडा परिवार किशनगढ़ वाले को सौभाग्य मिलातत्पश्चात आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की पूजा अर्चना अलग अलग मंडलों के द्वारा अष्ट द्रव्य समर्पित किए गए जिसमें जल प्रबंध समिति जैन नसिया, चंदन वर्धमान सागर वर्षायोग समिति एवं जिनधर्म प्रभावना समिति, अक्षत काफला महिला मंडल, पुष्प आदर्श नगर महिला मंडल, नैवेद्य जिनवाणी महिला मंडल, दीप नसिया महिला मंडल, धूप जैन वूमन ग्रुप, फल आदिनाथ महिला मंडल अर्घ्य चातुर्मास में सेवा भागी, कर्मठ कार्यकर्ता ने अष्ट द्रव्य समर्पित किए गए तत्पश्चात आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ को चातुर्मास समिति के संयोजक कमल आंडरा अध्यक्ष भागचंद फुलेता कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया मंत्री राजेश सर्राफ सह मंत्री धर्मेंद्र पासरोटियां कमल सर्राफ, नीटू छामुनिया मुकेश बरवास विकास अग्रवाल, ओम ककोड़, चेतन, एवं पंडित मनोज जी शास्त्री ने शीतकालीन प्रवास के लिएश्री फल भेट किया इस मौके पर वत्सल मतिमाताजी का तीन दिन में एक बार जल आहार के साथ समाधि की ओर अग्रसर हो रही है इसके पश्चात आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की नवीन पिच्छिका चतुर्मास के महामंत्री धर्मेंद्रपासरोटियां प्रमिला पासरोटियां और हितेंद्र सागर जी महाराज सोनू नीटू छामुनिया ने पिच्छिका भेट करके सौभाग्य और पुरानी पिच्छिका ग्रहण करने सौभाग्य मिला ससंघ के सभी मुनि, आर्यिका, के सभी बड़े भक्ति भाव, नई पिच्छिका ग्रहण की और संयम के साथ ग्रहण करने वाले श्रद्धालुओं ने पुरानी पिच्छिका ग्रहण की

इस मौके पर टोंक जिला प्रमुख ने सरोज नरेश बंसल ने जखीरा नर्सरी के सामने आयुष्मान हॉस्पिटल होते हुए nh -5 2तक मुख्य सड़क का नामकरण “प्राथमाचार्य शांतिसागर मार्ग”की घोषणा की इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर ने बताया किदिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पीछी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है, पीछी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ है इनके बिना अहिंसा मय महाव्रत का पालन नहीं हो सकता आदान निक्षेपण समिति तथा प्रतिस्थापना समिति का पालन नहीं कर सकते । इस कारण समस्त दिगंबर साधु वर्ष में एक बार पीछी का परिवर्तन करते हैं, आचार्य श्री ने पीछी के गुण में बताया कि यह धूल ग्रहण नहीं करती, लघुता रहती है ,पसीना ग्रहण नहीं करती ,सुकुमार झुकने वाली होती है ।यहां तक भी देखा गया है कि मोर पंख यदि आंखों में लग जाए तो बहुत चुभता नहीं है इससे आंसू नहीं आते कष्ट नहीं होता ।सबसे बड़ी बात यह है कि मयूर स्वयं पंख छोड़ते हैं इस कारण कोई हिंसा भी नहीं होतीआज पीछी कमंडल रूपी संयम रथ निरंतर चल रहा है,इसका श्रेय प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज को है । यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी ने 34 साधुओं के पीछी परिवर्तन समारोह के अवसर पर अतिशय क्षेत्र टोंक के श्री आदिनाथ जिनालय परिसर की महती धर्म सभा में प्रगट की । आचार्य श्री ने आगे बताया कि जिन्होंने साधुओं को संयम उपकरण पीछी देकर अनुमोदना की है, उन्होंने पुण्य का अर्जन किया है मयूर पीछी से कोमल वस्तु संसार में नहीं है इस महोत्सव को आपने आंखों से देखा है साधु एक वर्ष में मयूर पीछी से सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवो की रक्षा करते हैं ,अहिंसा महाव्रत के परिपालन का अन्य कोई उदाहरण देखने में नहीं आता है आचार्य श्री संघ में सभी 34 साधुओं की पुरानी पीछी नियमों व्रत के आधार पर पुण्यशाली परिवारों को दी गई। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व समाधिस्थ संयम साधना में सलग्न 72 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सल मति माताजी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी से लेकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का गुणानुवाद कर किया मंच संचालन मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं कार्यक्रम संचालन पंडित मनोज शास्त्री ने किया संयम उपकरण पिच्छिका जिन मुंद्रा और अहिंसा करुणा का प्रतीक है समस्त दिगंबर साधु वर्ष भर में एक बार पिच्छिका परिवर्तन करते हैं

नवीन पिच्छिका से मंगल आशीर्वाद दिया

इस मौके पर इंदौर, बंगलौर, किशनगढ़ , पारसोला,कोलकाता, सूरत, कोटा, जयपुर,प्रदेश भर से लोग गरिमामय में उपस्थित हुई

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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