मानव जीवन एक सुनहरा अवसर है खो दिया तो लौटकर आने वाला नहीं प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
मानव जीवन” एक सुनहरा अवसर है,खो दिया तो फिर लौट कर आने वाला नहीं” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होंने इस बात को संत और शिष्य की कथा से जोड़ते हुये कहा संत शिष्य की तपस्या से प्रभावित हुआ और लोहा से सोना बनाने वाली “पारसमणि” उसको दी और कहा कि इससे तुम जितना लोहा छुआओगे वह लोहा सोना बन जाएगा ।लेकिन शर्त यह है इसका प्रयोग सिर्फ एक ही बार कर सकते हो शिष्य ने गुरु की बात सुनी और बड़ा प्रसन्न हुआ और उस पारसमणी को लेकर अपनी झौपड़ी में लौटा तो देखा कि घर में कुंडी, कड़ाई और चिमटा ही लोहे का था यदि उसको सोने का बना लेगा तो खाना कैसे पकायेगा और कुंडी कैसे लगाएगा उसने अपनी जमीन बेची और कबाड़ी की दुकान पर गया तथा एक टृक लोहा का आर्डर दिया कबाड़ी ने उससे तीन दिन का समय मांगा और वह सपने देखने लगा और देखते ही देखते तीन दिन निकल गये लेकिन लोहा नहीं आया उसकी आकुलता badh गयी और धीरे धीरे सात दिन भी निकल गये तथा आठवे दिन सुबह सुबह संत आ गये और उन्होंने अपनी पारसमणि मांगी तो शिष्य हड़बड़ाया और कहा गुरुदेव में तो उस पारसमणि का तो में उपयोग ही नहीं कर पाया, एक दिन का समय और दे दीजिये लेकिन संत ने कहा कि “जो सात दिन में सोना नहीं बना पाया वह सात जन्म में भी सोना नहीं बना सकता” मैं क्या करुं तेरा भाग्य ही खोटा है? तुझे इतना अच्छा अवसर मिला पर तू उस अवसर को पहचान ही नहीं पाया।
तेरे जैसे अभागे के लिये मेरे पास अब और कोई उपाय नहीं अरे पगले लोहा कितना भी महंगा हो लेकिन वह सोने से तो सस्ता होगा,लेकिन तूने जो अवसर मिला उस अवसर को गंवा दिया,और संत ने उससे अपनी पारसमणी वापिस ले ली। मुनि श्री उक्त कथानक के माध्यम से कहा कि ये जो सप्ताह के सात दिन है यदि इन सात दिनों में अपने जीवन को स्वर्णिम नहीं बना पाए तो फिर कभी नहीं बना पाओगे उन्होंने कहा कि मानव पर्याय का समय सीमित है, सपने देखते देखते कब यह समय निकल जाएगा पता नहीं लगेगा और आठवे दिन मृत्यु रुपी एक हिचकी आएगी और आयु कर्म समाप्त हो जाएगा।


फिर यह मानव पर्याय मिले यह जरुरी नहीं? मानव पर्याय ही “पारसमणी” है जीवन को स्वर्णिम बनाने का एक सुनहरा अवसर है और ये सात दिन ही हमारे पास है संत कहते है कि “मौत” इन सात दिनों में ही आएगी और अपने साथ ले जाएगी उन्होंने कहा कि कभी यह लगता है,कि मानव जीवन कितना दुर्लभ है? 84 लाख योनियों को पार करके कठनाई से यह मानव पर्याय मिली है, अच्छे अवसर जीवन में यदा कदा ही मिलते है, यह अनुभव आप सभी को है, मुनि श्री ने कहा कि आप लोग अपने अपने फ्लेश में जाओगे तो देखोगे तो पाओगे कि जीवन में कयी कयी बार आपको अच्छे अवसर मिले जो कि एक गोल्डन चांस थे लेकिन उनका लाभ न उठाते हुये उन अवसरों को आपने खो दिया “जो मनुष्य प्राप्त अवसरों का लाभ उठाना नहीं जानता उनके जीवन में फिर कभी अच्छे अवसर नहीं आते”
मुनि श्री ने कहा कि “मनुष्य जन्म ही एक ऐसा अवसर है, जहा पर यह जीव अपना कल्याण कर सकता है। “जगत से जल्द से पार उतरने को यह अदभुत नौका है,मानव भव शाश्वत सुख पाने का अदभुत मौका है,जाग- जाग हे ज्योति पुंज यह अवसर बीता जाता जो क्षण गया- गया वह लौट फिर कभी नहीं आता” इसका अर्थ है कि यह मानव जीवन, जो बहुत ही दुर्लभ है, हमें जन्म-मृत्यु के चक्र और संसार के दुखों से मुक्ति दिला सकता है। यह नौका हमें इस भवसागर से पार उतारने का सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



