आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास निष्ठापन के साथ महावीर मोक्षकल्याण महोत्सव मनाया गया मोक्ष कल्याणक महोत्सव इसलिए मना रहे हैं कि हमें भी मोक्ष मिले आचार्य श्री
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में महावीर निर्वाण महोत्सव मनाया गया सुबह से ही भक्तों का मंदिर में आना शुरू हो गया भक्तों में भी काफी उत्साह उमंग दिखाई दी। 
प्रातः की बेला में आचार्य श्री ने संघ सहित चतुर्मास निष्ठापन की क्रिया सम्पन्न हुई इसी क्रम में सभी वेदियों पर अभिषेक शांतिधारा हुई नित्य नियम पूजन उपरांत सर्वप्रथम मूलनायक शांतिनाथ भगवान के समक्ष महावीराष्टक, निर्वाण कांड बोलते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किया।
इसके उपरांत आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ढोल नगाड़ों के साथ महावीर दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे जहां आचार्य श्री के सानिध्य में निर्वाण लाडू समर्पित किया गया इस बेला में नगर में काफी उत्साह उमंग देखी गई जगह जगह गुरुवर का पद प्रक्षालन किया गया एवम भक्ति उल्लास परिपूर्ण दिखा इसके उपरांत धर्म सभा हुई जिसमें सभी चातुर्मास मंगल कलश स्थापन करता परिवारो को मंगल कलश प्रदान किए गए।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने मोक्ष कल्याण का महत्व बताते हुए कहा कि हमारे आराध्य तीर्थंकर भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक है। जहां दुख, सुख,जन्म, मरण, बुढ़ापा,,भूख, प्यास है वहां मोक्ष नहीं होता। जहां इनका अभाव होता है वहीं मोक्ष हो जाता है। यह चीज मोक्ष देने वाली नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें गहराई से सोचना चाहिए कि जन्म मृत्यु सुख दुख प्यास में सुख नहीं है जहां इनका अभाव है वही सुख मिलता है। हमें रोज विचार करना चाहिए कि संसार में सुख नहीं है संसार में कुछ प्राप्त नहीं होता। इसीलिए हम मोक्ष कल्याणक बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि हम मोक्ष कल्याणक महोत्सव इसीलिए मना रहे हैं कि भविष्य में हमें भी मोक्ष मिले हमें भी हमारा भविष्य तय करना है इसीलिए मोक्ष कल्याण मनाते हैं। हमें वह करना है जो आत्महित में है। भगवान महावीर स्वामी ने समझाया कि अर्जन की विधि विसर्जन है। जो हमने अर्जन किया है उसे हमें विसर्जन करना ही होगा।
उन्होंने भगवान महावीर के संदेश जियो और जीने दो के विषय में कहा कि भगवान महावीर ने जिओ और जीने दो का संदेश दिया इसका आशय है कि किसी भी प्रकार की हिंसा न हो हमें इसे आत्मसात करना होगा।
मोक्ष कल्याणक महोत्सव इसलिए मना रहे हैं कि हम पराधीनता से स्वाधीनता में आए। दीपावली पर घर में पूजा इसलिए की जाती है की नकारात्मकता समाप्त हो जाए और चारित्र की प्राप्ति हो।
मंगल प्रवचन उपरांत प्रवचन सभा में सामूहिक रूप से निर्वाण कांड महावीराष्टक बोलते हुए आचार्य श्री संघ सानिध्य में निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312











