जैन दर्शन दीपावली महत्व 

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जैन दर्शन दीपावली महत्व 

जैन दर्शन जैन धर्म में दिवाली का महत्व जैन समुदाय इसे भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाता है. जैन मान्यतानुसार भगवान महावीर से जोड़कर इस पर्व को देखा जाता है. वह जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हे।

 

 

 

 उन्होंने बिहार के पावापुरी में कार्तिक अमावस्या के दिन मोक्ष प्राप्त किया था.जैन धर्म में दिवाली का अलग ही महत्व है. इस दिन ‘निर्वाण पर्व’ मनाया जाता है. जैन धर्म में दीपावली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व हिंदू परंपरा से भी अधिक माना जाता है l

 

 

 

जैन धर्म में निर्वाण का अर्थ और महत्व

जैन दर्शन में ‘निर्वाण’ का अर्थ है, जन्म-मरण के चक्र से पूर्ण मुक्ति, जहाँ आत्मा अनंत ज्ञान, आनंद और शांति की अवस्था को प्राप्त करती है। पावापुरी की पवित्र भूमि पर जब भगवान महावीर ने कार्तिक अमावस्या की रात निर्वाण प्राप्त किया, तब वह दिन समस्त जैन अनुयायियों के लिए शाश्वत स्मरण का प्रतीक बन गया। इसी घटना की स्मृति में दीप जलाए गए, जो आज दीपावली के रूप में मनाए जाते हैं।

 

जैन धर्म में दीपावली का इतिहास

भगवान महावीर के मोक्ष प्राप्त करने के समय, 18 राजाओं सहित अनेक गण-प्रमुखों और देवताओं ने पावापुरी में दीप जलाए थे। उन्होंने कहा कि आज ज्ञान का सूर्य अस्त हो गया, अतः हम उस प्रकाश की स्मृति में दीप जलाएंगे।

 

 

 

 दीपावली जैन धर्मावलंबियों के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक पर्व बन गया। जैन परंपरा में दीपक जलाना केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आत्मज्ञान के उजाले का प्रतीक है।

 

हम सब भगवान महावीर निवार्ण दिवस के रूप में दीपावली का त्यौहार मनाते हैं। इस दिन विधि-विधान से भगवान महावीर की पूजा-अर्चना की जाती है, निर्वाण लाडू (नैवेद्य) चढाकर आरती की जाती है तत्पश्चात बहुतायत की संख्या में दीपकों से मंदिर को सजाया जाता है। इसके अलावा सायंकाल को मंदिर जी में दीपमालिका की जाती है। 

 

 

 

दीपमालिका ज्ञान का प्रतीक है। दीपमालिका करते समय मन में भावना भानी चाहिए कि हम सभी को सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो और जीवन में अंधकार का नाश हो 

           अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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