“भगवान महावीर के उपदेश को आत्मसात कर अपने अंतरंग का हिस्सा बनायें”- मुनि श्री प्रमाणसागर
भोपाल
अवधपुरी में विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के श्री पारसनाथ जिनालय का नव निर्मित हाल खचाखच भरा हुआ था अवसर था जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के मोक्षकल्याणक का प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रातःकाल मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज एवं संघ के सभी क्षुल्लक महाराज ने विधी पूर्वक चातुर्मास निष्ठापन की क्रियायें संपन्न की।
इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि औपचारिक रुप से चातुर्मास का समापन भगवान महावीर के मोक्षकल्याणक के साथ हो जाता है लेकिन अंतिम कार्यक्रम संयम उपकरण पिच्छिका परिवर्तन के साथ समाप्त होता है। मुनि श्री ने कहा कि “मोक्ष मार्ग दुर्बलताओं और दुर्गुणों से मुक्ती होंने का मार्ग है, दुर्बलताएं एवं दुर्गुण समाप्त हो जाऐंगे तो दुःखों से भी मुक्ती मिल जाएगी”


उन्होंने कहा भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव को केवल भगवान की पूजा और आराधना का विषय न बनायें, बल्कि भगवान महावीर के उपदेश को आत्मसात कर अपने अंतरंग का हिस्सा बनाकर अपने जीवन में उतारने का पुरुषार्थ करेंगे तो आपका यह भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव मनाना सार्थक होगा मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य भव
चार लाख चौरासी हजार योनियों से भटकने के पश्चात प्राप्त हुई है,जिनको संसार में रस मिल रहा है,वह मुक्ति का प्रयास नहीं करता और इसी प्रकार संसार में भटकता रहता है। मुनि श्री ने कहा कि भगवान से सबका कच्चा चिट्ठा बनाकर रख दिया है,अपने अपने फ्लेश वैक में जाकर देखोगे तो तुम्हें अपनी कहानी याद आ जाऐगी इसी को शास्त्रों में जातिस्मरण नाम दिया गया है। मुनि श्री ने कहा कि हमारा अतीत बहूत लम्वा है चार लाख चौरासी हजार योनियों के चक्कर लगाकर यह मनुष्य भव मिला है,और भविष्य का भी कोई ठिकाना नहीं वह भी अनंत दिख रहा है लेकिन भगवान कहते है कि इस चक्र का अंत हो सकता है,अपने अतीत से प्रेरणा लो और संकल्प के साथ अपना लक्ष्य बनाओ और भविष्य को साकार करो जिससे जीवन बैहतर हो सके मुनि श्री ने कहा कि शास्त्र के बचनों को जो प्रमाण मानकर सच्चे श्रद्धानी होते है वही अपना बेड़ा पार कर पाते है, मुनि श्री ने कहा कि आज जो आपको मनुष्य पर्याय के साथ अच्छा कुल अच्छी संगति मिली यह जिनवाणी का समागम,यह तत्व का उपदेश सुनने को मिल रहा है,यह दोबारा नहीं मिलेगा और कहानी खत्म हो जायेगी
मुनि श्री ने कहा कि जैसे आपके हाथ में कोई मणी हो और वह आपके हाथ से छिटक कर समुद्र में गिर जाऐ तो दोवारा मिलना असंभव है,उसी प्रकार यह मानव जीवन और यह श्रावकपर्याय,ये गुरुओं का समागम, ये तत्व का उपदेश दोबारा मिलने वाला नहीं इसलिये जो प्राप्त है उसका सही उपयोग करें। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया प्रवचन उपरांत मुनि श्री के मुखारविंद से भगवान महावीर की निर्वाणकल्याणक भूमी पावापुरी के पद्मसरोवर का ध्यान करते हुये दिल्ली वाला परिवार ने मुख्य लाड़ू समर्पित किया तत्पश्चात विद्याप्रमाण गुरुकुलम्,चातुर्मास चक्रवर्ती एवं सभी नवरतन परिवार एवं कार्यकर्ताओं ने एवं तीसरे क्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं नै
भगवान के श्री चरणों में निर्वाण लाड़ू समर्पित किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
