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*चमत्कार से भी बड़ा चमत्कार है*
*गुरु दुर्लभ सागर का नाम*
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*सुनील जैन झंडा की*
✍️ *कलम से*
मंगलवार 7 अक्टूबर आचार्य श्री का जन्मोत्सव शरद पूर्णिमा का दिन…………….
दूर-दूर के श्रद्धालु पहुंच चुके हैं चैतन्य चमत्कारी श्री अरनाथ प्रभु की नगरी आरोन में स्थित वर्धमान कॉम्पलेक्स के उस परिसर में जहां मलप्पा जी एवं श्रीमति जी के लाल सदलगा के पीलू का जीवन चरित्र मंचित होने जा रहा है।
सबकी आंखों में विद्याधर से विद्यासागर होने के अनुपम दृश्यों को देखने की एक ललक दिखाई दे रही है।
सायं के 7:30 बजे का समय हो चुका है और मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज कार्यक्रम स्थल पर ही उपस्थित जन समुदाय को ध्यान की कक्षा लगाकर ध्यान करा चुके हैं ।श्रावकों द्वारा आचार्य श्री की आरती भी हो चुकी है।
मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज मंच पर से जा चुके हैं। सभी कलाकारों एवं टेक्निशियनों ने मंच सम्हाल लिया है। श्रोताओं को प्रतीक्षा है तो बस “रत्नत्रय दुर्लभ गाथा एक संत की” कार्यक्रम के शुरुआत होने की।
लेकिन ये क्या? तभी इंद्रदेव ने काले काले मेघों के साथ बारिश प्रारंभ कर दी है। बारिश का दौर थम नहीं रहा है । काफी देर से तेज़ तो कभी धीमी बारिश लगातार हो रही है।
कमजोर आस्था बालों ने अब उम्मीद का दामन छोड़ दिया है और वह संशय में हैं कि कि अब ये आयोजन होगा कि भी नहीं।
तभी हमारे कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि अन्यत्र स्थान से आने वाले कुछ लोग अब जा रहे हैं उन्हें रोकिए! मैने कहा बह विश्वास रखें कार्यकम तो आज ही होगा फिर भी वह जैसा उचित समझें अपने विवेक से निर्णय लें। इस घटनाक्रम के बाद गुना के हमारे मित्र *भाई मधुर जैन ने मुझसे कहाकि सुनील भैया आपका क्या मानना है? क्या सचमुच ऐसा लगता है कि अब भी कार्यक्रम होने की संभावना है?* तब मैने कहा कि हमें अरनाथ भगवान और मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज की भक्ति पर विश्वास है। संपूर्ण चातुर्मास में मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने पंच परमेष्ठि भगवान के प्रति जो अकाट्य श्रद्धान,आस्था और भक्ति जागृत कराई है उस आस्था और विश्वास के बल पर *हम 100% ही नहीं वरण 1000 % आश्वस्त हैं कि कार्यकम तो आज ही होगा। भाई मधुर जैन ने मेरे उक्त दृढ़ विश्वास के कथन को मोबाईल में रिकॉर्ड भी कर लिया।* आठ बार बारिश ने कभी तेज़ तो कभी धीमी होकर व्यवधान डाला लेकिन जिसने 6 अक्टूबर को दुर्लभ अतिशय को देखा था उन्हें तो आज 7 अक्टूबर को भी विश्वास था कि आज फिर अतिशय होगा और कार्यक्रम होकर रहेगा।
रात्रि को 10 बजने को आए हैं अरनाथ भगवान पर अकाट्य श्रद्धान रखने वाले स्वयं सेवकों ने स्वयं अपनी त्रुटि देखी कि मंच पर अरनाथ भगवान का चित्र नहीं है। *जल्दी से चित्र लाया गया। गुरु आज्ञा से अरनाथ भगवान के समक्ष बड़े जैन मंदिर में दीप प्रज्वलित किया गया एवं मंच पर अरनाथ भगवान की तस्वीर को रखा गया। इसके पश्चात्य ही इंद्रदेव ने काले-काले मेघों को समेटना प्रारंभ कर दिया और देखते ही देखते दूधिया रोशनी से नहाया हुआ रजतमयी धबल चंद्रमा आसमान में अपनी चांदनी बिखेरता हुआ सभी को कार्यक्रम स्थल पर अपनी अपनी जगह ले लेने के लिए संकेत करने लगा।*
जो टेकनीशियन सामान पैक करने लगे थे उन्होंने अपने तकनीकी सामान को मंच पर व्यवस्थित करना प्रारंभ कर दिया। जब यह आयोजन प्रारंभ हुआ तो फिर रात को तीन बजे तक नृत्य गायन नाटक संवाद कला संस्कृति के साथ ही राष्ट्र और धर्म के प्रति आस्था से ओतप्रोत अद्भुत संगम में ऐसा झूमा कि श्रोताओं ने भी भक्ति और आस्था के सागर में खूब डुबकी लगाई एवं सभी कलाकारों ने भी उपस्थित श्रोताओं के धैर्य और विश्वास के साथ साथ दिए स्नेह के प्रतिउत्तर में अपार जन समूह की उपस्थिति की भूरी भूरी प्रशंसा की।
आसपास के शहरों से जो लोग देर से कार्यक्रम में शामिल होने आरोन पहुंचे वह यह देखकर दंग रह गए कि आरोन की चारों दिशाओं में पाँच किलोमीटर के दायरे में भारी से भारी बारिश हो रही है और आचार्य श्री के जन्मोत्सव का कार्यक्रम स्थल वर्धमान कॉम्पलेक्स में पैर रखने की जगह नहीं है। ऐसा कैसे संभव हो रहा है? लेकिन जो अरनाथ भगवान पर अकाट्य श्रद्धान रखने वाले हैं,जिन्हें दुर्लभ गुरु के आशीर्वाद पर अकाट्य श्रद्धान है वह निश्चिंत और आश्वस्त थे कि कार्यक्रम तो निसंदेह सफल ही होगा। और ऐसा हुआ भी। इस आयोजन के स्टार कलाकार *स्काय किंग आकाश जैन* जोकि बड़े बड़े मेट्रो शहरों में अपना कॉन्सर्ट देते हैं वह आरोन जैसे छोटे नगर में अपना कार्यक्रम करने के प्रति अनिच्छुक थे। उन्हीं स्काय किंग आकाश जैन ने भी हजारों की संख्या में मौजूद आरोन के श्रोताओं की आस्था भक्ति और आचार्य श्री के प्रति जुनून की हद तक के समर्पण को देखकर भरे मंच से कहाकि मैने अपने जीवन में आरोन बालों जैसी भक्ति और भक्त आज तक नहीं देखे।
जिन्होंने आज तक आरोन वाले अरनाथ भगवान के दर्शन नहीं किए हैं जिन्होंने अभी तक वात्सल्य मूर्ति पूज्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के दर्शन नहीं किए हैं वह आरोन आकर स्वयं इन अतिशयों से परिचित हो सकते हैं।
और यहां से आप जब बापिस जाएंगे तो निश्चित ही गुनगुनाएंगे कि-
*दुर्लभ सागर महाराज मै दीवाना हूं तेरा*……………………..
