गीत संगीत का धर्म और मजहब से कोई संबंध नहीं है लेकिन संगीत इंसान को ईश्वर से जोड़ने का कारण बन सकता है प्रसन्न सागर महाराज 

धर्म

गीत संगीत का धर्म और मजहब से कोई संबंध नहीं है लेकिन संगीत इंसान को ईश्वर से जोड़ने का कारण बन सकता है प्रसन्न सागर महाराज 

  देवली 

अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिक्षा भुमी परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान के लिए चल रही है उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि गीत-संगीत का धर्म और मजहब से कोई संबंध नहीं है..लेकिन संगीत इन्सान को ईश्वर से जोड़ने में कारण जरूर बन सकता है..! भक्त जब परमात्मा की प्रार्थना करता है और जब वह ध्वनि के रूप में आलाप भरता है, तब चाहे अल्लाह हो, जीसस हो, शिव शंकर हो, राम, महावीर, हनुमान हो – सभी की प्रार्थना में विचार और विकार शून्य अनहद नाद का अनुभव होता है। वही ध्यान का प्रथम चरण है।

 

 

संगीत की स्वर-लहरियों में निहित गंभीरता, ध्यानमय नाद, विचार-शून्य आलाप और आध्यात्मिक तरंगें सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान और आनंद का अभिन्न अंग रही है। इसलिए कहा जाता है कि हमारे मूल स्वभाव में ही ध्यान और साधना का संगीत बसता है। जब हम किसी राग को गहरी श्वास के साथ साधते हैं, तो वह केवल सुरों का विस्तार नहीं होता, बल्कि भीतर की शांति और विचार-विकारों से मुक्ति की खोज का माध्यम भी बन जाता है।

 

 

 

 

ओमकार की गहन ध्वनि ही ईश्वर के स्वरूप का प्रतीक है और वही आनंद और शान्ति का धाम है। आज की दौड़ती-भागती, गिरती ज़िन्दगी में मन के भटकाव का बहाव बहुत तेज है। मन के भटकाव को रोकने में संगीत एक माध्यम बन सकता है। यह केवल संगीत ही नहीं बल्कि भीतर की यात्रा का पाथेय भी बन सकता है। यदि हम इसे खुले मन से अपनायें तो मन की शान्ति, मन का अनुशासन, मन की ऊँचाई, मन की सकारात्मक सोच में बहुत बड़ा परिवर्तन आ सकता है।

 

 

संगीत की कोई धार्मिक सीमा नहीं है, इसलिए हमारे मन के नाद, राग, और भक्ति के आलाप हमारे जीवन को बेहतर बना सकते हैं। हमने बचपन से सुना, सीखा और यही जाना कि संगीत साधना है, और साधना का लक्ष्य ईश्वर से तादात्म्य बनाने का अच्छा माध्यम है। जिन्हें संगीत से प्रेम नहीं य गाना नहीं आता, उन्हें उससे द्वेष हो सकता है लेकिन बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद वाली कहावत उनके लिए चरितार्थ होती है…!!!     

 

 

आज अहिंसा संस्कार पदयात्रा दिशा: देवली, जहाजपुर, नीमच होते हुए अंदेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र, एवम् परतापुर, बांसवाडा राजस्थान की ओर बढ रहे हैं l

 

 

परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ सहित दिनाँक 16 फरवरी 2026, सोमवार से सूबह 11 बजे से 17 फरवरी मंगलवार दोपहर 3.00 बजे तक 

(रात्रि विश्राम एवम् आहारचर्या) होटल हाईवे फोर्ट, नियर ब्ल्यू वाटर पार्क, नियर मंगलपेट्रोल पम्प,देवरावास मोड, हाईवे, जयपुर-कोटा रोड पर विराजमान है             

 

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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