आत्मा की थेरेपी तीर्थंकर की शरण में होती है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

धर्म

आत्मा की थेरेपी तीर्थंकर की शरण में होती है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

रामगंजमंडी

परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में हो रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान में 1024 अर्ध समर्पित किए गए।

     आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि हम कोई भी कार्य करते है तो लक्ष्य बनाते हैं कि हमें कार्य क्यों करते हैं ऐसे ही तीर्थंकर भगवान के शरण में बैठने का हमें लक्ष्य बनाना पड़ता है। शरीर में कुछ कष्ट पीड़ा होती है तो थेरपी होती है उसी प्रकार आत्मा की भी थेरेपी होती है जो तीर्थंकर भगवान की शरण में होती है। जो कुछ भी बिगड़ा हुआ है बिगड़ रहा है वह सारा का सारा तीर्थंकर भगवान के चरणों में सही हो जाता है।

 

उन्होंने कहा कि यदि तीर्थंकर भगवान को याद कर लिया और उनका मात्र नाम लेने से सारी कष्ट पीड़ा दूर हो जाती है। उन्होंने जितनी गहराई से आप परमात्मा और तीर्थंकर भगवान के प्रति समर्पित हो जाएंगे आपकी भक्ति बढ़ जाएगी उतनी ज्यादा आपकी आत्मा की थेरेपी होती चली जाएगी। भगवान के प्रति गहराई से आस्था होनी चाहिए। गहराई से जुड़ेंगे तो समस्या दूर होगी उतना शुभ भाव बनेगा और शुभ कार्यों की सिद्धि होगी। 

 

   भक्त स्वार्थी होता है 

भक्त की परिभाषा देते हुए कहा कि भक्त प्योर स्वार्थी होता है वह भगवान की चिंता नहीं करता अब अपनी चिंता करता है। जब हमारा मन अच्छा नहीं होता है तब हमें लगता है भगवान अच्छे नहीं है और जब हमारा मन अच्छा होता है तो हमें लगता है भगवान अच्छे हैं। उन्होंने कहा हमारी दृष्टि मात्र जुड़ने की होनी चाहिए इतनी गहराई से जुड़ना है कि वह हमारे आत्मा के एक-एक प्रदेश में भगवान विराजमान हो जाए।

     

आचार्य श्री के चरणों का पद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लेते भक्त
सिद्ध चक्र महामंडल विधान करते हुए भक्त अरघ समर्पित करते हुए

 

 

    शक्ति को छुपाना पाप है

आचार्य श्री ने कहा कि आपके पास शक्ति है परमार्थ स्वरूप में उतरने की निर्विकल्प भक्ति करने की उन्होंने कहा जैन दर्शन में स्पष्ट लिखा है शक्ति को छुपाना सबसे बड़ा पाप है। दान के विषय में कहा शक्ति के अनुसार दान करो। उपवास और एक आसन की बात है तो शक्ति के अनुसार करो। जब आपको छूट दी गई है कि धर्म ध्यान शक्ति के अनुसार करो तो फिर आप अपनी शक्ति को क्यों छुपा रहे हैं।

धर्म क्षेत्र में शक्ति को छुपाना सबसे बड़ा पाप है। आप सब कर सकते हैं लेकिन नहीं कर नहीं रहे हो बहुत हानि है।

आप अपनी शक्ति को पहचान नहीं पाए नहीं कर सकता यह व्यक्ति को प्रमादी बनाता है। जिसके पास प्रमाद नहीं होता वह बहाना नहीं बनाता। 

       अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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