जो आपके पास नहीं है उसकी कमी सताती है–मुनि पुंगव सुधासागर महाराज
टीकमगढ़ –
-व्यक्ति के पास जो होता है उसका सुख उसे नहीं होता। जो उसके पास नहीं होता है उसकी कमी उसे सताती है ।कोई ऐसी वस्तु नहीं जिसका विरोधी पक्ष ना हो ,दुनिया का कोई ऐसा शब्द नहीं हुआ जिसका विरोधी शब्द ना हुआ हो, प्रत्येक इंद्री अपना स्वतंत्र कार्य करती है। एक इंद्री दूसरी इंद्री का सहयोग नहीं करती जब हमारी आंख में परेशानी होती है तो कान इंद्री उसका सहयोग नहीं करती।
यह उद्गार मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी के पंचकल्याणक महोत्सवके दूसरे दिन धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

इसके पहले आज गर्भ कल्याणक का उत्तर रूप दिखाया गया। व गर्भ कल्याणक की पूजन की गई। प्रातः 6:00 बजे से मंगलाष्टक रक्षा मंत्र श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा इसके बाद पूजन संपन्न हुई।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज आदिनाथ मंदिर ढोगा से आकर मंच पर विराजमान हुए ।मुनि श्री के पाद प्रक्षालन चित्र अनावरण का परम सौभाग्य सुंदर लाल अशोक जैन एवं सुरेश जैन निर्भय जैन को प्राप्त हुआ
मुनि पुंगव के चरणों में पहुंची दर्शनोदय तीर्थ कमेटी
अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थ थुबोंनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टिंगू मिल उपाध्यक्ष राकेश अमरोद महामंत्री विपिन सिंघाई मंत्री विनोद मोदी प्रचार मंत्री विजय धुर्रा आडीटर राजीव चन्देरी संरक्षक शैलेन्द्र दददा परम संरक्षक सुरेश चन्द्र श्री लोकेन्द्र कुमार वरोदिया, लालू जैन, रोशन जैन सहित अन्य भक्तों ने परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज जी महाराज के के चरणों में श्री फल भेंट किए इस दौरान दर्शनोदय तीर्थ कमेटी के संरक्षक सदस्य के रूप में नवीन सदस्यता रोशन लोकेन्द्र कुमार ने ग्रहण की।
इस दौरान जयपुर से पधारे धर्म संस्कृति यात्रा टीकमगढ़ पहुंची जहां उत्तम चंद पंड्या परिवार सहित अजय कुमार संजय कुमार कटारिया विनोद पहाड़ियां सहित सैकड़ों भक्तो ने श्री फल भेंट किए इस दौरान पंच परमेशष्टी विधान किया गया इसके बाद श्री उत्तम चंद पंड्या परिवार का सम्मान किया गया
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हम दुसरो के सहयोग की अपेक्षा से दूर रहें*एल
मुनि श्री ने कहा कि जब हमारे शरीर की इंद्रियां भी हमारे बस में नहीं है फिर हम दूसरों से कैसे सहयोग की अपेक्षा कर सकते हैं ।यह पांचों इंद्रिया स्वतंत्र कार्य करती हैं। ऐसे ही आत्मा के गुण अपना स्वतंत्र कार्य करते हैं। जैन दर्शन कहता है जो भी तुम्हारे पास है उसको पूर्ण समझो संपूर्ण समझो अपनी सत्ता स्वाधीन रखो जब हम देखना चाहे अपने गुणों को मजबूत करना है। एक दूसरे गुणों का सहयोग नहीं करता है सब कुछ होते हुए भी तुम्हें महसूस करना कि हमारा कोई नहीं है दर्शन को इतना समर्थ मान लो कि जब हम कोई पदार्थ देखना चाहे तो हमें देखने की अनुभूति होना चाहिए।सत्य को चुनौती के रूप में स्वीकार करना है। हमें सत्य से ऊपर उठना है ।रात है यह सत्य है, लेकिन रात्रि में दिन की अनुभूति हो जाए यह चमत्कार है।
सोमबार मनाया जायेगा भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव
सोमवार को सुबह 7:48 पर बालक आदि कुमार का जन्म होगा संपूर्ण अयोध्या नगरी को सजाया गया है घर घर जन्म की खुशियों में दीपक जलाए जाएंगे मिठाई बांटी जाएगी एक पल तो नारकीय जीवो को भी नरक में शांति का अनुभव होता है। यह सब बालक आदि कुमार के जन्म के प्रभाव के कारण होता है।
तीर्थंकर के गर्भ में आने के 6माह पहले से ही देवता उनकी भावी जन्म नगरी में दिव्य रत्नों की बर्षा 15माह तक लगातार रोज करते हैं।
तीर्थंकर को जन्म देने वाली माँ को 16स्वप्न दिखाई देते हैं।तीर्थंकर के जन्म से सौधर्म इन्द्र का आसन कंपायमान होता है व अन्य चारों निकाय के देवों के महलों में भी विचित्र संकेत होते हैं व नरक के जीवों को भी कुछ क्षण की शांति मिलती है।
तीर्थंकर के जन्म के बाद सौधर्म इन्द्र बालक को ऐरावत हाथी पर बिठाकर सुमेरु पर्वत पर ले जा कर अभिषेक कर असंख्य देवों के साथ तीर्थंकर का जन्म कल्याणक मनाता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया
रामगंजमंडी की रिपोर्ट
