बंधाजी के अजीतनाथ भगवान को बैठकर नहीं लेटकर करें दंडवत नमस्कार विनम्र सागर महाराज

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बंधाजी के अजीतनाथ भगवान को बैठकर नहीं लेटकर करें दंडवत नमस्कार विनम्र सागर महाराज
बंधाजी

पावन पुनीत बुंदेलखंड के प्राचीनतम अतिशय क्षेत्र में से एक बंधाजी मैं महा महोत्सव पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज सानिध्य में चल रहा है।

यहां के अजीत नाथ भगवान की महिमा बहुत ही अद्भुत है वह यहां का अतिशय अभूतपूर्व है शनिवार की बेला में पूज्य मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ने बहुत ही अभूतपूर्व वर्णन करते हुए बताया कि यह प्रतिमा इतनी तेजस्वी एवं अतिशय कारी है की इस सदी के महानतम आचार्य विद्यासागर महाराज का यहां दो बार मंगल आगमन हो चुका है। उन्होंने पुरानी स्मृति को ताजा करते हुए कहां था कि जहां पर भगवान अजीतनाथ विराजित हैं यह स्थान उनका नहीं है। जब अजीतनाथ भगवान भौयरे से 40 फीट ऊपर बैठेंगे तब उनकी दृष्टि बाहर निकलेगी। उससे गांव का क्षेत्र व प्रदेश का नक्शा बदलेगा। दुनिया भर के लोग भगवान अजीतनाथ की सेवा करने इस क्षेत्र पर आएंगे।

 

 

 

 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में क्षेत्र का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने अवगत कराया कि अजीतनाथ भगवान की प्रतिमा 1000 साल से भी अधिक प्राचीन है। प्रतिमा जी के ऊपर जो स्वस्ति लिखी है यह चेत्र सुदी तेरस संवत 1199 ईसवी की अंकित है। जिसे आज भी हम पढ़ सकते हैं। भगवान अजीतनाथ के दाएं और बाय और 2 प्रतिमाएं खडगासन में विराजमान है। जो अपने आप में सिद्ध है।

 

 

पूज्य मुनि श्री ने यहां की प्रतिमा में बहुत ही उर्जा को बताया और कहा कि इस प्रतिमा में इतनी ऊर्जा है, इतना अतिशय है कि हमें इनको बैठकर नहीं लेट करके दंडवत नमस्कार करना चाहिए। उन्होंने इस बात की ओर भी इंगित किया कि काल दोष के कारण जो परंपराएं हमसे छूट गई थी, मैं उन्हें आज जागृत कर रहा हूं। जिसे छोटी सी जगह में भगवान अजीतनाथ विराजमान है यह स्थान उनका नहीं है। इतिहास के विषय में कहा कि कालांतर में जब हमारे देश पर औरंगजेब का शासन था, उस समय मंदिरों को तोड़ा गया। और मूर्तियों को भी नष्ट किया गया। उसी काल में हमारे पूर्वजों ने अजीतनाथ भगवान को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। इस कारण जमीन के नीचे भौयरा बनाकर प्रतिमा को विराजमान कर दिया। आज उन्हीं भगवान को उच्चासन देने के लिए बंधा में विश्व के प्रथम रजत मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

निश्चित रूप से पूज्य मुनि श्री के संघ सहित आगमन से इस मंदिर के निर्माण को गति मिलेगी। इसका परिणाम यह हो रहा है कि मुनि श्री के सानिध्य में कई भक्तों ने क्षेत्र के ट्रस्टी एवं सदस्य बनने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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