आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने संलेखना पूर्वक समाधि मरण को समझाया सलेखना पूर्वक समाधि मरण के लिए कषायो को कृष करना होगा आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए संलेखना पूर्वक समाधि मरण को समझाया उन्होंने कहा कि प्रत्येक जैनी की अंतिम इच्छा होती है कि उसका समाधि मरण हो जाए इसके लिए बहुत तैयारी चाहिए तैयारी चाहे धीरे-धीरे हो लेकिन तैयारी होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि हम शरीर से कषायों को कृष करे लेकिन कषायो को कृष करना बहुत कठिन है।
आत्मा हिंसा करें वह कषाय है
आचार्य श्री कहा कि परेशानियां कषायों से प्राप्त हो रही है यदि बैर होगा तो मान के कारण होगा प्रतिक्रियाएं कषायों के कारण होती है हम अज्ञानी होकर कषायों का समर्थन करते हैं।। आत्मा की यदि हम हिंसा करें तो वह कषाय है आत्मा का पराभव कराने वाली कषाय है जो नरक का कारण है। मनुष्य में समस्या और संतुष्टि नहीं है। यह भी कषायों का ही कारण है। यहां तक यहां तक की देव गति में भी देव भी कषायों की वजह से पीड़ित हैं।
समाधि मरण करना है तो कषायों को समझना होगा और कंट्रोल करना होगा।आचार्य श्री ने समाधि मरण के लिए सबसे बड़ा पुरुषार्थ कषायों को समझना और उसे पर कंट्रोल करना बताया। आप कुछ करो या न करो कर्म यदि उदय में आएगा तो फल तो मिलेगा ही। उसके फल को भोगना ही है। दो नाव में सवार व्यक्ति दुनिया को तो पार कर सकता है लेकिन नदी पार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जिनेंद्र भगवान पर श्रद्धा रखना यदि श्रद्धा रखी तो व्यक्ति संसार से पार हो सकता है।




आचार्य श्री ने चार कषायों के विषय में बताते हुए कहा कि कषाय हमारे अंदर भरी हुई है जो हमें क्रोध मान माया लोभ में ले जाता है क्रोध आने पर आपको आनंद नहीं बनाना चाहिए दुखी होना चाहिए हम कषायो में ऐसे अंधे हो जाते हैं कि हम अपना नुकसान कर बैठते हैं और एक दूसरे से लड़ने के लिए भी तैयार हो जाते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि यदि संलेखना पूर्वक समाधि मरण करना है तो कषायों पर नियंत्रण होना आवश्यक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



