शरीर मे लग जाये आग, उससे पहले कर लो त्याग-मुनि श्री प्रणीत सागर पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस पर उत्तम त्याग धर्म की हुई पूजन

धर्म

शरीर मे लग जाये आग, उससे पहले कर लो त्याग-मुनि श्री प्रणीत सागर पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस पर उत्तम त्याग धर्म की हुई पूजन-

देवली,धर्मनगरी देवली मे विवेकानंद कॉलोनी स्थित पार्श्वनाथ धर्मशाला में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री विधेय सागर जी महाराज के सान्निध्य में चल रहे पर्युषण पर्व महामहोत्सव के अंतर्गत अष्टम दिवस पर “उत्तम त्याग धर्म” पर सम्बोधन देते हुए बताया की त्याग किया गणतं का पर क्या किया मनगढ़ंत का!मुनि श्री ने सूत्र के माध्यम से बताया “शरीर मे लग जाये आग, उससे पहले कर लो त्याग” 

 

 

 

प्रातः काल मे 6.30 बजे सर्वप्रथम श्री जी की शांतिधारा एवं अभिषेक पूजन की गई! इसी के साथ प्रातः 9 बजे से 10 बजे तक प्रातःकालीन श्रुतशाला के विद्यार्थियों द्वारा तत्त्वार्थ-सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया गया ! वाचन के उपरांत मुनि श्री ने आज अष्टम अध्याय का विस्तार से अर्थ बताते हुए बताया की तत्त्वार्थसूत्र के आठवें अध्याय में जैन धर्म की मिथ्यादर्शन,अविरति,प्रमाद,कषाय,और योग (मन वचन काय ) कर्म बंध के कारण है !मिथ्यादर्शन:मिथ्यात्व कर्मोदय से सात तत्वों, नौ पदार्थों में अश्रद्धान होना अथवा अतत्वों में श्रद्धान होना मिथ्यादर्शन है! मिथ्यादर्शन के दो भेद बताए,१-गृहित और २- अगृहित है और इनका अर्थ समझाया! इसी के साथ दोपहर में चल रहे 64 ऋद्धिमन्त्र विधान पे मुनि श्री ने बताया की मंत्रो से तप की शक्ति बढ़ती है एवं तप से त्याग की, तप के प्रभाव से जो चमत्कारी शक्तियां उतपन्न होती है वही व्रत कहलाते है, ओर यही मंत्रो का प्रभाव भी होता है! 

मीडिया प्रभारी विकास जैन टोरडी ने बताया की प्रथम सत्र में भगवान की प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य माणकचन्द,दीपक कुमार बाजटा वाले परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन, चित्रणावरण, द्विपप्रज्वलन, एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य सौभाग्य सुशील जी जैन पटवारी परिवार को प्राप्त हुआ! इसी के साथ बताया की दोपहर के सत्र में “64 ऋद्धिमन्त्र विधान” का आयोजन वाणीभूषण पंडित प्रवर श्री अंकित जी शास्त्री दमोह(MP) वाले सांखना राजस्थान एवम संगीतकार अवनीश जैन गुना के निर्देशन में हुआ! विधान पुण्यार्जन एवं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य नेमीचंद जी, धर्मचन्द जी साँडला परिवार को प्राप्त हुआ!  

इसी के साथ मे रात्रि में सांस्कृतिक क्रार्यक्रम के अंतर्गत “विचित्र जैन वेशभूषा” का मंचन समाज के बालकों द्वारा किया जाएगा! संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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