ब्रह्मचारी राजेंद्र भैया अब मुनि श्री 108 वृषभदत्त सागर महाराज के नाम से जाने जाएंगे मोक्ष मार्गी को धन संपत्ति रिश्ते नाते कुछ नहीं भाता आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज

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ब्रह्मचारी राजेंद्र भैया अब मुनि श्री 108 वृषभदत्त सागर महाराज के नाम से जाने जाएंगे मोक्ष मार्गी को धन संपत्ति रिश्ते नाते कुछ नहीं भाता आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज
सागर
बहेरिया फोरलेन पर स्थित तपोवन तीर्थ पर आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज द्वारा शाहपुरा के नगर गौरव ब्रह्मचारी राजेंद्र भैया को मुनि दीक्षा प्रदान की दीक्षा के संस्कार करते हुए आचार्य श्री ने उन्हें मुनि श्री 108 वृषभ दत्त सागर महाराज नामकरण किया अब उन्हें इस नाम से जाना जाएगा।

 

 

 

मुनि दीक्षा के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन सम्मिलित रहे। और इन वैराग्य के पलो के साक्षी बने। दीक्षार्थी के धर्म के माता-पिता बनने का सौभाग्य उन्हीं के गृहस्थ जीवन के पुत्र एवं पुत्रवधु आकाश मोनिका जैन को प्राप्त हुआ। केशो को प्राप्त करने का सौभाग्य रुचि संदीप जैन भोपाल निवासी को प्राप्त हुआ। दीक्षा उपरांत मुनि श्री 108 वृषभ दत्त सागर महाराज को नवीन पिच्छिका भेट करने का सौभाग्य उनकी गृहस्थ जीवन की धर्मपत्नी निर्मला जैन, कमंडल भेट करने का सौभाग्य देवेंद्र कुमार बबलू सरखेड़ी को प्राप्त हुआ। आपको बता दे ब्रह्मचारी राजेंद्र भैया ने एमटेक तक अध्ययन किया है।

 

 

पूज्य आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने इस अवसर पर कहा कि तलवार की धार पर चलने के समान होता है मुनिव्रत का पालन

 

 

करना। पंडित राजेंद्र जैन जी ने अपने कल्याण का मार्ग चुना है। हमे पहले ही संभावना थी की सब कुछ होने के बावजूद इन्हें रोक पाना संभव नहीं है। वैराग्य पथ पर चलने का निर्णय किसी मजबूरी या अभावग्रस्त जीवन के कारण नहीं लिया जाता। संपन्नता और समृद्धि के बावजूद मन में ही वैराग्य के अंकुर पनपते हैं। धन, संपत्ति, रिश्ते, नाते शोहरत मोक्ष मार्गी को कुछ नहीं भाता। वह सबको ठोकर मार कर वैराग्य की ओर मुड़ जाता है ऐसा ही यहां भी हुआ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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