“संयम हमारे जीवन के रुपांतरण का आधार है”- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज
भोपाल (अवधपुरी) दशलक्षण धर्म का आज छंटवा दिवस “उत्तम संयम” का है, मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने सभी शिवारार्थियो को संबोधित करते हुये कहा कि “संयम” का संबंध केवल प्रवृति और शालीनता से नहीं,संयम कासंबंध मनोवृत्ति केपरिष्कार से है, इन दस दिनों में आप सभी नेअपने भीतर के “संयम” को जगा लिया तो जीवन भर उसका असर दिखेगा “संयम हमारे जीवन का रुपांतरण ही नहीं करता बल्कि वह हमारे जीवन का सुरक्षा कवच है,हमारी चेतना के निखार का मूल है।
उन्होंने कहा भाव ,विचार,वाणी,तथा व्यवहार चारों में संयम आना चाहिये यदि हमारे भावों में शुद्धी, विचारों पर नियंत्रण, वाणी में लगाम तथा व्यवहार में संतुलन होगा तो हम संयम के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे, मुनि श्री ने कहा कि अपने अपने अंदर झांक कर देखिये कि आपके अंदर भावों की कितनी शुद्धी है? भाव ही मनुष्य के विचारों को जन्म देते है, कहा जाता है कि एक सामान्य मनुष्य को 24 घंटे के अंदर साठ हजार विचार आते है इनमें से काम के बहुत कम होते है।

मुनि श्री ने कहा विचार मन से उत्पन्न होते है, और “भावनायोग” हमारे मन और विचारों की शुद्धि करता है, उन्होंने कहा कि अपने विचारों के प्रहरी बनो, और उन पर नियंत्रण रखो


भावों का अनुशासन ही भावों का संयम है,संयम से आत्मबल का निर्माण होता है,जो आत्मा की ऊर्जा को बाहर बिखरने से रोकता है,संयमी व्यक्ति अपने निर्णयों के प्रति दृढ़ होता है वह इच्छाओं का गुलाम नहीं होता बल्कि उसका स्वामी होता है, मुनि श्री ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया भोगवाद की अंधी दौड़ में भाग रही है तब जैन धर्म का “उत्तम संयम” जीवन को दिशा दैने वाला प्रकाश स्तंभ है जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण कर लेता है तो वह सच्चे आत्मबल, शांति,और आनंद को प्राप्त करता है।
उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया उत्तम संयम दिवस पर उन सभी संयमीयो का सम्मान किया गया जिन्होंने अभी तक पांच उपवास निरंतर कर लिये है तथा जिनका सात और दस उपवास का संकल्प है उन सभी ने गुरु चरणों में श्री फल अर्पित करते हुये आशीर्वाद प्राप्त किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



