संयम केवल इंद्रियों को वश में करना नही यह आत्मा की सबसे बड़ी विजय-मुनि श्री प्रणीत सागरसुगन्ध दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया, मंदिरों में धूप क्षेपण किया*

धर्म

संयम केवल इंद्रियों को वश में करना नही यह आत्मा की सबसे बड़ी विजय-मुनि श्री प्रणीत सागरसुगन्ध दशमी का पर्व धूमधाम से मनाया, मंदिरों में धूप क्षेपण किया*

देवली,धर्मनगरी देवली मे विवेकानंद कॉलोनी स्थित पार्श्वनाथ धर्मशाला में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रणीत सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री विधेय सागर जी महाराज के सान्निध्य में चल रहे पर्युषण पर्व महामहोत्सव के अंतर्गत षष्टम दिवस पर उत्तम संयम धर्म एवं सुगन्ध दशमी पर मुनि श्री ने अपनी अमृत वाणी से लाभान्वित करते हुए बताया की पोराणिक कहानी अनुसार राजा विजयसेन के एक कन्या उत्पन्न हुई जिसका शरीर अत्यंत ही दुर्गंध दायक था, जिससे उसका नाम दुर्गन्धा रखा गया! एक बार किसी दिगम्बर मुनि के नगर आगमन पर राजा विजयसेन ने मुनि श्री से अपनी शंका का समाधान किया जिस पर मुनि श्री ने दुर्गन्धा के पूर्व भव का वर्णन किया एवं बताया की दिगंबर मुनिराज के प्रति द्वेष भाव रखने से इस जीव की यह गति हुई है एवं सुगन्ध दशमी व्रत से इसका यह दोष दूर होगा, ओर इस व्रत के फलस्वरूप दुर्गन्धा कन्या अगले भव में कौशाम्बी के राजा महिपाल के मदनावती नाम की कन्या ने जन्म लिया जिसका शरीर अत्यंत ही सुगन्धित था तो यह उसी के व्रत के फलस्वरूप था!

 

 

 

 

प्रातः काल मे 6.30 बजे सर्वप्रथम श्री जी की शांतिधारा एवं अभिषेक पूजन की गई! इसी के साथ प्रातः 9 बजे से 10बजे सम्पूर्ण भारत देश एवं विदेश से श्रावकों ने तत्त्वार्थ-सूत्र के 10 अध्याय का वाचन किया !

 

 

 

 

वाचन के उपरांत मुनि श्री ने आज तत्वार्थ सूत्र के षष्टम अध्याय का विस्तार से अर्थ बताते हुए बताया की आश्रव (कर्मों के आगमन) के कारणों और उसके भेदों का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि शुभ योग पुण्य और अशुभ योग पाप का कारण है, जो इन्द्रियों, कषायों और क्रियाओं से उत्पन्न होते हैं। यह अध्याय जीव और अजीव अधिकरणों के माध्यम से आश्रव के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाता है, जिसमें जीवाधिकरण के 108 और अजीव अधिकरण के 11 भेद शामिल हैं।

 

 

 

 

इसी के साथ उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन देते हुए बताया की जिसके मन,वचन,कर्म वासना ओर आसक्ति से विरक्त होते है वही सच्चे अर्थ में संयम को धारण कर सकता है! संयम केवल इंद्रियों को वश में करना नही यह आत्मा की सबसे बड़ी विजय है!

 

 

मीडिया प्रभारी विकास जैन टोरडी ने बताया की प्रथम सत्र में भगवान की प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य आदिनाथ युवा मंडल को प्राप्त हुआ,इसी के साथ मुनि श्री का पादप्रक्षालन, चित्रअनावरण, दीप प्रज्वलन, एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य भी इसी मण्डल को प्राप्त हुआ! इसी के साथ बताया की दोपहर के सत्र में “णमोकार महामन्त्र विधान” का आयोजन वाणीभूषण पंडित प्रवर श्री अंकित शास्त्री दमोह(MP) वाले सांखना राजस्थान एवम संगीतकार अवनीश जैन गुना के निर्देशन में हुआ! विधान पुण्यार्जन एवं सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य मोहनलाल, महावीर टोंक वाले परिवार को प्राप्त हुआ! 

 

इसी के साथ मे रात्रि में सांस्कृतिक क्रार्यक्रम के अंतर्गत “” का मंचन स्थानीय समाज द्वारा किया जाएगा! शहर के सभी जिनालयों में सुगन्धदशमी पर्व पर श्रावकों द्वारा धूप का क्षेपण किया गया, एवं कर्म निर्जरा की भावना भाई गई!*

   

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

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