क्रोध, मान, माया और लोभ से उपजा पाप जबकर्म के रूप में उदय होता तो सहन नहीं होता सुधासागर महाराज 

धर्म

क्रोध, मान, माया और लोभ से उपजा पाप जबकर्म के रूप में उदय होता तो सहन नहीं होता सुधासागर महाराज 

 अशोकनगर

सबसे पहले विचार किया जाता है कि हमारे जीवन को गंदा कौन कर रहा है अपने जीवन को गन्दा करनेवाली चार कषाय क्रोध मान माया लोभ है। जब कोई चीज घुल मिल गए तो निकालना बहुत मुश्किल होता है ये चार कषाय हमारे जीवनमें दूध में पानी की तरह मिल गए। इनसे उपजा पाप जब कर्म के रूप में उदय आता हैं तो सहन नहीं होता ।

 

 

ज्ञान ही कष्य रूप हो जाएं जिस समय आत्मा जैसे भाव करता है। वैसे ही आत्मा हो जाती है। संसार में इतना अभ्यास हो गया कोई भी अपना मिलते ही राग उमड़ पड़ता है। जब की वैराग्य होना चाहिए वैराग्य की चर्चा नहीं सहज वैराग्य होना चाहिए।

 

क्षमा की चर्चा नहीं उत्तम क्षमा की बात कही गई है। संसार में रहकर संसार से ऊपर उठना है व्यापार करते हुए भी व्यापार से ऊपर उठना है। उक्त धर्म उपदेश अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने व्यक्त किए।

 

शोभायात्रा दोपहर दो बजे निकलेगी

धूप दशमी महापर्व पर विशाल शोभायात्रा श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी एवं अरिहंत ग्रुप के संयोजन दोपहर दो बजे सुभाष गंज जैन मन्दिर निकाली जाएगी, जो शहर से प्रमुख बाजार से होते हुए शान्तिनगर गांव मंदिर, प्रोसेशन रोड, पुराना थाना, गांधी पार्क होते हुए बगीचा मंदिर जाएगी। धूप समर्पित की जाएगी।

 

दस हजार दीपों से होगी आरती: अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर में धूप दशमीके दिन दस हजार दीपों से आरती होगी। इसमें शिविरार्थियों के हाथों में जगमगाते दीपक होंगे। शाम सात बजे प्रभु के साथ परम पूज्य गुरुदेव की महा आरती होगी। 

 

लड़ाई भी बराबरी वालों से करनी चाहिए

मुनिश्री ने कहा कि आचार्य के साथ महाराष्ट्र की ओर 1980 में विहार कर रहे थे। इस दौरान आचार्य श्री ने कहा था कि बड़ों को  छोटों के मुंह नहीं लगना ।पूज्य गुरुदेव ने कहा कि अपने बराबरी वाले से बात करनी चाहिए। आचार्य श्री ने दो मिनट तक समझाया। वह बात हमारे लिए मंत्र बना गया। किसी ने गाली दे दी तो दो मिनट देखना बराबरी वाले से बात करो। जगत में जीना है तो क्या वह तुम्हारी बराबरी वाला है। आओ-आओ मेरे पास सत्य का पिटारा है। तत्वचर्चा किससे करें। सम्यक दृष्टिसे बात करें दो ज्ञानी उलझ जाएं तो दो मिनट में सुलझ जाते हैं।ज्ञानी और अज्ञानी उलझ गए तो कभी नहीं सुलझ सकते।

     

 

 महाराज श्री ने कहा  सत्य को समझते ही नहीं है। सत्य परेशान हो सकता है सूली परचढ़ नहीं सकता।

   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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