सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
दशलक्षण पर्व के पंचम दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई तत्वार्थ सूत्र के मुख्य तीन मंडल पर अर्ध समर्पित किए गए। एवम नित्य नियम पूजन की गई।
इस बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने उत्तम सत्य धर्म पर प्रकाश डाला आचार्य श्री ने सत्य के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्य का मतलब होता है ऐसी स्थिति में पहुंच जाना जो आत्मा के अलावा कहीं ना हो। वचनों में ही सत्य होना चाहिए वचनों से तो व्यक्त होता है लेकिन सत्य तो आत्मा में होता है। क्रिया में सत्य दिखाई देता है लेकिन वह सत्य आत्मा में होता है। सत्य धर्म आत्मा का धर्म है।

असत्य का कारण कषाय होती है
जिसके हृदय मे कषाय होती उसकी आत्मा में सत्य नहीं हो सकता जो कषाय होती है वह हमें असत्य बोलने पर मजबूर करती है यह कषाय है जो हमें असत्य तक पहुंचाती है


उन्होंने कहा सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। यह भी बात सही है सत्य बोलने से व्यवहार बिगड़ जाएंगे और हो सकता है सत्य बोलने पर व्यक्ति नाराज हो जाए। यह भी हो सकता है कि सत्य बोलने से यह भी संभव है कि व्यक्ति हमसे संपर्क ना रखें। सत्य से संपर्क है तो किसी से संपर्क करने की जरूरत नहीं है।
दुनिया का सबसे बड़ा सत्य यह है कि हमारा कुछ भी नहीं है व्यक्ति का कुछ भी नहीं है उन्होंने कहा जैन दर्शन कहता है कमाओ खाओ उतना कमाओ उतना खाओ जिसमें आत्मा का अहित ना हो
कठोर वचन असत्य होते है
आचार्य श्री ने कहा जो भी कठोर वचन होते हैं वे असत्य होते हैं कितने सत्य का जामा पहना हुए हैं और वे कठोर वचन है तो वह भी असत्य है आप किसी को भोजन के लिए बुलाओ अप शब्द बोलकर बुलाओ तो वह यह कहेगा की खिलाना होता तो अच्छे से बोल जाता प्रेम से बोला जाता नहीं खिलाना तो अपशब्दों के साथ निमंत्रण दिया जा रहा परिवार में सबसे बड़ी समस्या असत्य यानी बोले जाने वाला कठोर वचन सत्य बोले लेकिन ऐसा सत्य भी ना बोले की किसी का हृदय दुखी हो जाए। परिवार के विषय में बोलते हुए कहा कि आज परिवार में सबसे ज्यादा कठोर वचनों का प्रयोग होता है हमने तो कठोर वचन कह दिए लेकिन सामने वाले के हृदय में बैठ गया तो अगर हमने कठोर वचन बोलना छोड़ दिया तो दूसरों की निंदा नहीं होगी और असत्य नहीं होगा। अच्छा मकान अच्छे कपड़े अच्छा पैसा अच्छा ऑफिस होने के बाद उस समय अगर आप असत्य का प्रयोग कर रहे हैं तो नरक जाएंगे। 

उन्होंने कहा बस एक प्रतिज्ञा करो की पति पत्नी से झूठ नहीं बोलेगा पत्नी पति से झूठ नहीं बोलेगी। क्योंकि सब झूठ यही बोले जाते हैं। यह प्रतिज्ञा कर लो उत्तम सत्य धर्म बन जाएगा आपका। यदि ऐसा किया तो 80% सत्य आपकी आत्मा में बस जाएगा। क्योंकि सबसे ज्यादा असत्य यही बोला जाता है और सबसे ज्यादा असत्य बोलने की आदत यहीं से पड़ती है।

समझदार आत्माओं कहते हुए गुरुदेव ने कहा कठोर वचन मत बोल यह लाइन ध्यान रखना कठोर नहीं बोलना पहले अच्छा समय था लोग एक दूसरे को टोक देते थे लेकिन अब नहीं करते क्योंकि लोगों को बुरा लगता है लोग जान रहे हैं यह गलत कर रहा है यह सही नहीं कर रहा है फिर भी लोग चुपचाप खड़े रहते हैं क्योंकि टोंक देंगे तो सामने वाला झगड़े को तैयार हो जाएगा कुछ भी बोल देगा। जबसे टोकना बंद हुआ लोग गलत करने लग गए गलत राह पर चले गए तब से लोग अधर्म और असत्य में चले गए। जबकि हमे प्रसन्न होना चाहिए सामने वाले ने हमारी फिक्र तो की और हमें बताया तो सही हमारा दोष है हमें प्रसन्न होना चाहिए सामने वाले को धन्यवाद देना चाहिए। उत्तम सत्य धर्म को आत्मसात करे यह भावना करे कठोर वचन मुख से ना निकले। दूसरे की निंदा न हो और असत्य वचन मुख से न निकले।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

