मरना पसंद करना,मगर अभिषेक करना मत छोड़ना, – मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज*सैकडो लोगों ने एक साथ किया सामूहिक अभिषेक,मुनि श्री ने स्वयं लगाया सभी को गंधोदक
(मुंगावली)
शनिवार को नगर में विराजमान पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज संसघ के सानिध्य में संत निवास पर नगर के समस्त पुजारियों द्वारा सामूहिक रूप से प्रभु का अभिषेक और शांतिधारा की गई। जिसके बाद मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं को अपने हाथों से गंधोदक लगाया।इस आयोजन में बड़ी संख्या में पुजारी पहुंचे वही इस अवसर मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं को अभिषेक,ओर शांतिधारा के लाभ और हानि के बारे में बताया।
मुनि श्री ने कहा कि आपको मनुष्य पर्याय मिली है ,जानते हो कितना पुण्य अर्जित किया होगा तब जाकर आपको जैन कुल मिला,उसमें भी पूरे भारत में बुंदेलखंड मिला। जहां प्राचीन सभ्यता आज भी मानी जाती है ।आप लोगों को पता नहीं है अभिषेक की महिमा। एक बार महिला को गंधोदक नहीं मिला तो वह मरने के लिए तैयार हो गई , यह होती है भगवान के प्रति श्रद्धा। अभिषेक और मौत में एक चुनना पड़े तो मौत को चुन लेना मगर भगवान के अभिषेक को मत छोड़ना ।



महाराज श्री ने कहा कि में बहुत करुणा और दया करके कह रहा है 100 मुनिराजों का आशीर्वाद वो काम नहीं करेगा जो एक बार अभिषेक करने से होगा।कितना ही बड़ा संकट आ जाए उसे कोई दूर कर सकता है तो वो है गंधोदक ।बचपन में पिता से, जवानी में पति से ओर बुढ़ापे में बेटे के हाथों से बना हुआ गंधोदक लेना चाहिए ।घर में गंधोदक लाने वाला है और घर की महिलाएं गंधोदक के लिए दूसरे से भीख मांग रही है।इससे बड़ा अभागा कोई नहीं होगा। रोटी के लिए भीख मंगवा लेना मगर आज से आप के घर महिलाएं गंधोदक के लिए दूसरे से भीख न मांगे इतना ध्यान रखना।
नगर के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब इतना बड़ा आयोजन एक दिन में कर लिया गया हो।
आज हर व्यक्ति अपने बेटे को नौकरी कराना चाहते हैं ।आप अपनी बेटी की शादी किससे करना चाहते हैं सर्विस वाले से ऋषभ देव अवधि ज्ञानी थे वे जानते थे कि नौकरी करने वाले को गिनकर मिलता है। ऐसे ही होटल में खाना खाने वाले का पेट तो भर सकता , पर खाना गुण कारी नहीं हो सकता। वह तो तो चाह रहा है तुम ज्यादा रोटी खायें तो उसे पैसे ज्यादा मिलेगा । जहां जहां गिनकर दिया जाये, चाहे वह नौकरी का वेतन हो चाहे होटल की गिनकर दी गई रोटियां वह पराधीनता है ।यह आपको ज्यादा ताकत नहीं दे सकती। हर जैनी के पास खेती होना चाहिए ।आज प्रसंग आया है तो कह देता हूं हर जैनी के एक खेत होना चाहिए जो अपने और अपने गुरु को खिला सके।
उन्होंने कहा कि किसान सुखी रोटी खाकर भी आनंद मनाता है क्योंकि वह बीज बोने से लेकर खेतों में लहलहाती फसल तक अपने आंखो के सामने सब कुछ देखता है। यही वह चीज है जो भरपूर ताकत किसान को देती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
