मुनि श्री संधान सागर महाराज का कायोत्सर्ग मुद्रा में आत्मध्यान

धर्म

मुनि श्री संधान सागर महाराज का कायोत्सर्ग मुद्रा में आत्मध्यान

भोपाल (अवधपुरी) मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का प्रत्येक सोमवार को मौन के साथ उपवास रहता है इस दिवस वह धर्म ध्यान में लीन रहते हें तथा पूरा समय अपने लिये ही रिजर्व रखते है एवं आम श्रद्धालुओं से नहीं मिलते उन्ही के संघस्थ मुनि श्री संधान सागर महाराज प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा तप करते है कि देखने वाले दांतों तले उंगली दबा लेते है, सोमवार को जब मुनि श्री आहार चर्या को निकले तो चारों ओर नमोस्तु नमोस्तु के स्वर गूंजे लेकिन यह क्या मुनि श्री ने सभी भक्त श्रद्धालुओं की ओर देखा सभी विधी लिये खड़े थे किंतु आज उन्होंने जो विधी ली थी वह किसी के पास नहीं मिली बार बार श्रद्धालुओं ने विधी बदलने की कोशिश भी की लेकिन मुनि श्री तो शायद अलाप विधी का सोचकर ही निकले थे और उन्होंने तीन बार सभी की ओर देखा विधी नहीं मिलने पर वह मुस्कुराते हुये अपने कक्ष की ओर चल दिये तथा वंहा जाकर खड़े होकर ध्यानस्थ हो गये एवं लगातार यूंही 12 घंटे का संकल्प के साथ खड़े खड़े तप कर रहे है..।

 

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनि श्री प्रति सोमवार को कुछ न कुछ ऐसा अनोखा तप करते रहते है जिससे कर्मों की निर्जरा हो 48 घंटे निराहार पानी के त्याग के पश्चात उनकी अगली आहार चर्या मंगलवार को होगी ऐसे तपस्वी साधक को सभी समाज वंधु नमन करते है।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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