सहनशीलता क्रोध को पैदा न होने देना साध्य सागर महाराज
सनावद:- सहनशीलता क्रोध को पैदा न होने देना। क्रोध पैदा हो ही जाए तो अपने विवेक से, नम्रता से उसे विफल कर देना। अपने भीतर क्रोध का कारण ढूंढना, क्रोध से होने वाले अनर्थों को सोचना, दूसरों की बेसमझी का ख्याल न करना। क्षमा के गुणों का चिंतन करना ही उत्तम क्षमा कहलाता है।
क्षमा से मन का शुद्धिकरण होता है और व्यक्ति को शांति मिलती है। जैन धर्म में, क्षमा को आत्मा की शुद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है।उक्त उद्बोधन नगर में चातुर्मासरत मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के प्रथम दिन कहे।
इसी क्रम मे मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म का महत्व बताते हुए कहा की दस लक्षण धर्म जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे मुख्य रूप से दिगंबर जैन समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह पर्व जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों को उजागर करता है और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। दस लक्षण धर्म, पर्युषण पर्व के बाद वाले दस दिनों में मनाया जाता है और यह जैन धर्म के दस प्रमुख लक्षणों या गुणों का उत्सव है।
सन्मति जैन काका से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
