अन्तर्मना उवाच* (13 फरवरी!) अपना समय पागलपन में नहीं, अब तो परम हंस बनने में लगाओ.. प्रसन्न सागर महाराज 

धर्म

अन्तर्मना उवाच* (13 फरवरी!) अपना समय पागलपन में नहीं,
अब तो परम हंस बनने में लगाओ.. प्रसन्न सागर महाराज 

अपना समय पागलपन में नहीं,
अब तो परम हंस बनने में लगाओ..
*क्योंकि आज के रिश्ते और रिश्तेदार स्वार्थ और पैसों से चल रहे हैं..!

 

 

 

सबसे ज्यादा समझदार कहलाने वाला इंसान, सबसे ज्यादा दु:खी और परेशान मिलेगा। जिनको हम नादान, ना-समझ जानवर कहते हैं, वो हमें सुखी दिख रहे हैं, वनस्पत इंसान की अपेक्षा। इंसान को जो स्कूल, कॉलेज, शिक्षक, मन्दिर, मस्जिद, गिरजा, धर्म और धर्म गुरू नहीं सिखा पाये,, वो पशु, पक्षी, जानवरों से सीखें तो बहुत कुछ सीख सकता है। 
जैसे —

 

 

वो रात को कुछ नहीं खाते।रात को घूमते नहीं।अपने बच्चों को वो खुद ट्रेनिंग देते हैं। दूसरों के पास नहीं भेजते। वो ठूस ठूस के नहीं खाते।थोड़ा सा खाकर उड़ जायेंगे, पर साथ लेकर नहीं जायेंगे।
 समय से सोते हैं और सुबह ब्रह्ममुहूर्त में गाते गुनगुनाते उठ जायेंगे।
 अपना भोजन कभी नहीं बदलते।

 

अपने कुल, वंश में ही शादी करेंगे। दूसरी बिरादरी में नहीं। काग और हंस की जोड़ी कभी नहीं देखोगे। अपने शरीर से सतत् काम लेंगे। रात के अलावा विश्राम नहीं करते। बिमार होने पर भोजन छोड़ देते हैं। जब स्वस्थ होंगे तभी खायेंगे। अपने बच्चों से खूब प्यार करते हैं। नौकरों के सहारे नहीं छोड़ते। आपस में मिल जुलकर ही रहते हैं। लड़ने, झगड़ने पर फिर एक हो जाते हैं। प्रकृति के सभी नियमों का पालन करते हैं। अपना घर इको फ्रेंडली बनायेंगे।आप सोचो समझदार कौन-?* इसलिए –भूमि और भाग्य का एक ही स्वभाव है..*एलजो बोओगे, वो ही पाओगे…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 

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