*पर्यूषण पर्व नहीं दशलक्षण धर्म बोलिए*। आचार्य श्री सुनील सागर महाराज
आजकल दिगम्बर जैन समाज में पर्यूषण पर्व का बोलने में ज्यादा आ रहा है। दिगम्बर जैन समाज अपनी परम्परागत शब्दावली को छोड़, अन्य शैली को अपनाया जा रहा है
*परम पूज्य आचार्य श्री सुनील* *सागर जी महाराज ने स्पष्ट रूप से* *कहा है कि पर्युषण नहीं बोलें आप व* *हम सभी दश लक्षण धर्म ही बोलें*।
*हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप *परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज को जरूर जरूर सुनें*।और दश लक्षण धर्म ही बोलें और इसका प्रचार प्रसार किया जाय*।
*इसी प्रकार श्वेताम्बरों में मिच्छामि दुक्कडम शब्द बोला जाता है,
उनका नेटवर्क बहुत ज्यादा है दिगम्बर समाज , युवा पीढ़ी अपनाने लगी है* ।
*अपने दिगम्बर परम्परा में जो मूल शब्द हैं। आचार्य भगवंत बोलते हैं,व कहते हैं*
*वो ही प्रयोग होना चाहिए कृपया गम्भीरता से विचार किया जाए*
*जय जय जय हो आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज जी की*
