अन्तर्मना उवाच* (05 मार्च!)बहुत आसान है ज़मीं पर घर-मकान, आलीशान बंगला बना लेना..
अपनों के दिल में जगह बनाने में जिन्दगी गुजर जाती है..!*
एक समय था – *जब घर का मुखिया घर जाता, तो घर में सन्नाटा सा हो जाता था।* सारा घर काँप जाता था, तब घर में इतना दब-दबा था। पर *आज ना कोई डरता है, नहीं काँपता है, मुखिया के आने पर कोई सावधान भी नहीं होता*। सब अपने अपने मोबाइल, फोन और काम में मशगूल रहते हैं। यदि ऐसा हो रहा है, तो समझना अब मुखिया का प्रभुत्व समाप्त हो गया है। *घर से मुखिया का प्रभुत्व समाप्त होने लगे, तो समझदारी इसी में है कि वानप्रस्थ की तैयारी कर लेना चाहिए।*
एक समय था – *जब घर का मुखिया घर जाता, तो सब खड़े हो जाते थे*। दो तीन जगह से पानी आता था। लेकिन अब तीन बार मंगाओ तब एक बार पानी आता है, वह भी मुश्किल से, तो समझना आपका प्रभुत्व समाप्त हो गया है। पहले आप बोलते थे, तो सभी सुनते थे, घर का मुखिया बोलता था तो किसी कि चू की भी आवाज नहीं आती थी। अब सभी बोलने लगे और खरी खोटी सुनाते भी हैं। जब सबकी सुनना पड़े तो समझना, आपका प्रभुत्व समाप्त हो गया है।

*जब मन, शरीर और इन्द्रिय थक जाये, तो संसार के प्रति व्यामोह, आसक्ति, मूर्च्छा कम करते हुये वान प्रस्थान की तैयारी कर लेना चाहिए…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त संकलन के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929777312
