नगर गोरव निकलंक सागर जी महाराज का समाधी दिवस मनाया गया
शाढ़ौरा
शाढ़ौरा नगर के गौरव मुनिश्री निकलंक सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस शनिवार को श्री पार्श्वनाथ मंदिर में मनाया गया। इस अवसर पर भक्तो ने मुनि श्री निकलंक सागर महाराज को विनयांजलि अर्पित की।
एक परिचय पूज्य मुनि श्री
मुनिश्री निकलंकसागर जी महाराज का जन्म 28 फरवरी 1984 को शाढौरा में हुआ था। उनके घर का नाम पुनीत था। उनके पिता का नाम प्रकाशचंद व माता का नाम आशा जैन है। आपने लौकिक शिक्षा में एमए कर संयम के पथ को अपनाते हुये 2 अप्रैल 2011 में जबलपुर में आचार्य विद्यासागर जी महाराज से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया। आपकी मुनि दीक्षा आचार्यश्री के द्वारा 10 अगस्त 2013 को शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रामटेक जिला नागपुर महाराष्ट्र में हुई
धर्म प्रभावक संत थे
अपने गुरु के सानिध्य में ज्ञानार्जन करने के बाद कुछ वर्षों से गुरु आज्ञा से वह पूज्य मुनि प्रसाद सागर महाराज के उपसंघ में रह कर साधना व धर्म प्रभावना कर रहे थे। वह ऊर्जा से भरपूर धर्म प्रभावक संत थे। उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में महावीर की वाणी को जीवन में धारण कर अहिंसा का जय घोष किया। वे अच्छे साधक व प्रवचन कर के साथ ही जैन धर्म की गहराइयों को समझने वाले युवा तपस्वी थे। गत वर्ष कोरोना काल में अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर धर्म ध्यान पूर्वक समाधि ने उनकी साधना को सार्थक कर दिया। बड़ी संख्या में भक्त व श्रद्धालुओं ने उनका पुण्य स्मरण कर उन्हें विनयांजलि अर्पित की।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
