साधु-संतों के जीवन में ठहराव नहीं होता-आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी मुरार (ग्वालियर) के लिए हुआ विहार
मुरेना
सन्त महात्माओं की जिंदगी में ठहराव तो होता ही नहीं हैं । खासकर जैन साधुओं की जिंदगी में । जैन साधु साध्वी कभी भी विना किसी विशेष कारण के एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं ठहरते । जैन साधु-साध्वी यदि किसी मन्दिर या मठ का निर्माण कराते हैं तो वह परमार्थ के लिए कराते हैं । वह कभी भी अपने लिए मन्दिर, मठ या धर्मशाला का निर्माण नहीं कराते । साधु-संतों का कोई घर द्वार नहीं होता । किसी ने कहा भी है “बहता पानी, रमता जोगी” । जैन साधु-साध्वियां सदैव पद विहार करते हुए विभिन्न स्थानों पर धर्म प्रभावना करते हैं । इसी कारण अब हमें भी आगे की ओर विहार करना होगा । स्थानीय समाज बहुत ही समझदार और ज्ञानवान हैं । मुरेना धर्म नगरी के साथ साथ वाकई में संस्कारधानी हैं । यहां के महिला, पुरुष, युवा एवं बच्चे सभी धार्मिक कार्यो में रुचि रखते हुए साधु संतों, आर्यिकाओं की चर्या में संलग्न रहते हैं ।
मैंने ज्ञानतीर्थ पंचकल्याणक से आजतक जो भी आपको धर्मोपदेश दिए हैं, उनका अनुसरण करते हुए उन्हें अपने चरित्र में समाहित करने का प्रयास करना, यही मेरा सबको आशीर्वाद है । उक्त धर्मोपदेश जैन साध्वी गुरुमां श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने मुरेना से मुरार विहार के दौरान ऋषभ इंटर प्राइजेज पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये ।

मनोज नायक ने बताया की पूज्य
गुरुमां ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त स्वस्तिधाम जहाजपुर से मुरेना पधारी थी । आपके निर्देशन में श्री मज्जिनेन्द्र पँचकल्याक प्रतिष्ठा महोत्सव ऐतिहासिक सफलता के साथ सम्पन्न हुआ ।

आपने अल्प प्रवास में मुरेना समाज को अनेकों सौगातें प्रदान कीं । आपकी प्रेरणा एवं आशीर्वाद से जैन बगीची में मां स्वस्ति इंटर नेशनल स्कूल एवं नसियां जी जैन मंदिर में सन्त निवास की आधार शिला रखी गई । बड़े जैन मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा, शिखर कलशारोहण, सामान्य ज्ञान परीक्षा जैसे भव्य कार्यक्रम सम्पन्न हुए ।
इसी दरम्यान मुरेना नगर में प्रथमवार 125 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का ऐतिहासिक आयोजन सम्पन्न हुआ ।

मंगल विहार के समय सभी की आंखें नम
प्रातःकालीन बेला में आर्यिका संघ ने मुरार के लिए विहार किया तो सभी की आँखे भर आईं । सभी लोग गुरुमां से अभी और रुकने का आग्रह कर रहे थे । विहार के समय सैकड़ो की संख्या में पुरुष, महिलाएं, युवा माताजी के साथ हाथों में ध्वजा लेकर पैदल चल रहे थे । आज की आहारचर्या जैन मंदिर बानमोर में हुई।

मुरार से सर्वश्री योगेश जैन खोआ, अशोक पोली, सुभाष नेताजी, मनिंदर, तन्नू, आशीष, अंकुश, दीपू, मनोज, पुष्पेंद्र, रवि, रजत, अर्पित, लाला, राजू, विकास सहित अनेकों युवा साथी विहार में सम्मिलित हुए ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
