“जाग्रत ऊर्जा कभी हीन नही होती वह आपकी जिंदगी को बदल देगी” मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज
भोपाल (अवधपुरी)”न शरीर थका, न मन थका न कोई शारिरिक वीमारी है, फिर भी कोई काम करने की इच्छा का न होंना ही ऊर्जा हीनता है”उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये” मुनिसंध के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 27 जुलाई रविवार से मुनि श्री के प्रवचन प्रातः8:30 बजे से9:20 तक लगातार 7 दिन तक “भावनायोग का विज्ञान” विषय पर होंगें इसी के साथ 15 मिनट का प्रतिदिन “भावनायोग” भी कराया जाएगा।जिससे अपनी भावनात्मक शक्ति को पहचान कर उसे दिशा देने तथा आत्मबल में रुपांतरित कर सकें।
मुनि श्री ने “ऊर्जा प्रवाह” की वैज्ञानिकता को सिद्ध करते हुये कहा कि ब्रह्मांड में अनंत ऊर्जा है उस ऊर्जा के माध्यम से हम अपनी आध्यात्मिक यात्रा को संपन्न कर सकते है,

मुनि श्री ने”ऊर्जा हीनता” पर चर्चा करते हुये कहा कि दूसरों की चिंता, और अस्तव्यस्त दिनचर्या एवं “अनुशासनहीनता” से व्यक्ती जल्दी थकता है,उन्होंने कहा कि “आध्यात्मिक उपेक्षा और भूखा मन” कभी भी अपनी आत्मा को नहीं जीत सकता मुनि श्री ने “ऊर्जाहीन” तथा”ऊर्जावान” व्यक्ती के लक्षण बताते हुये कहा सकारात्मक ऊर्जा से मन प्रफुल्लित रहता है तथा तरोताजगी बनी रहती है,वही “नकारात्मक ऊर्जा” हमारी शक्ति को नष्ट करती है, कोई काम न होते हुये भी थकान आती है उन्होंने कहा कि शरीर के स्वास्थ के लिये शुद्ध भोजन है तो को मन की खुराक स्वाध्याय है,उन्होंने “दिनचर्या” को महत्व देते हुये कहा कब उठना?कब सोना?कब खाना? कैसा खाना, तथा कहा पर अपनी शक्ति को लगाना, कहा पर शक्ति को नहीं लगाना चाहिये यह बात जिसे समझ आ जाती है वह अपना टाईम मेनेजमेंट को संभाल लेता है। उन्होंने कहा कि पहले के लोग अपना समय अच्छा साहित्य को पढ़ने में लगाते थे आजकल की जनरेशन तो अच्छा साहित्य पड़ना ही नहीं चाहते अपना समय मोबाइल और टी.वी सीरीयल में ही नष्ट करते है जो कि नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करते है।
उन्होंने कहा किहमेशाअच्छा पढ़ो,अच्छा देखो,अच्छा सुनो और अच्छा कहोगे तो तुम्हारी सकारात्मकता बढ़ेगी और जो भी योजना बनाओगे वह व्यर्थ के कार्यों में नहीं जायेगी। मुनि श्री ने कहा कि आप लोग अपनी दिनचर्या को भी साधना के रुप में परिवर्तित कर सकते है, तथा अपने आपको हमेशा तरोताजा बनाये रखने के लिये “ऊर्जा प्रवाह के साथ भावनायोग में बार बार दौहराइये कि मैं चेतन ऊर्जा का स्त्रोत हूं”मैं निष्क्रियता का त्याग करता हुं” ये दो वाक्य आपकी जिंदगी को बदलने के लिये काफी होंगे,आप देखेंगे कि आपकी ऊर्जा कितनी जाग्रत हो गई है, “जाग्रत ऊर्जा कभी हीन नही होती वह आपकी जिंदगी को बदल देगी”
(अविनाश जैन विद्यावाणी) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

