वर्षा योग में हों रही है निरंतर धर्म की प्रभावना।
सनावद -: नगर में विराजित युगल मुनिराज प्रतिदिन धर्ममई गंगापर पर प्रवाह कर रहे है इसी क्रम में संत भवन में कही मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने अपनी वाणी का रसपान करवाते हुवे कहा की इन जीवों के लिए हेय उपादेय की लालसा करे हुवे बताया की पांच पाप, सप्त व्यसन, परिणाम पाप हेय है छोड़ने योग्य नहींहे। ओर संवर्धन,निर्जरा,मोक्ष ये मोक्ष के साधन उपादेय होते हैं। जब जीव इन तत्वों को नहीं समझता है जब तक इन तत्वों को समझता है तब तक इस संसार में परिभ्रमण करता रहता है । पंच महाव्रत,पंच समिति क्यों कहें हे, क्योंकि इनके पालन के बिना कोई मुनि नहीं बनता कोई मुनि बने बिना साधु कहे बिना निर्वाण को नहीं प्राप्त करता है एक देश निर्जरा, श्रावक वृत्ति अणुवृत्ति ये भी होते हे । एक देश निर्जरा आप कीभी प्रारम्भ है, एक देश संवद निर्जरा आप का भी हे आप भी अणुव्रतों का पालन करते हुवे मोक्ष मार्ग की भावना प्रकट कर सकते हो।
जब माता पिता बूढ़े हों जाएं वृद्ध हो जाएं तो ये मत समझ लेना की किसी काम के नहीं हे।जब आप कुछ काम के नहीं थे जब आप के माता पिता युवा अवस्था में आप के बहुत काम के थे। आप को पढ़ा लिखा दिया आप को गुरुओं के चरणों में बैठा दिया है आज वो दिवंगत हों गए हैं आज जिन्होंने ने ढाई द्वीप में मुनिराजो की सेवा करना जिन्होंने सीखा दिया ऐसे मां बाप को मत भूलना। जैन दर्शन में आचार्यत भगवंत कहते हैं जो इस भव में मुनिराजो के मंच सजाता है वो भविष्य में मुनिराजो के शमवशरण सज़ाते हे।
आज होगी शुभ मूहर्त में वर्षा योग कलशो की स्थापना
सन्मति जैन काका ने बताया की नगर में विराजित द्वय मुनिराजों मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के वर्षायोग के मंगल कलशो की स्थापना रविवार 27 जुलाई को प्रातः 7:30 बजे सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ मुहूर्त में बड़े मंदिरजी में होगी।
सभी सौभाग्यशाली परिवार जिन्होने कलश लिए वो कलश स्थापित कर पुण्य का संचय करेंगे।
वहीं दोपहर में युगल मुनिराजो के सानिध्य में दोपहर 2.30 बजे से संत भवन में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ महामंत्र ज्याप अनुष्ठान युगल मुनिराजो के सानिध्य में किया जायेगा।
