आरंभ परिग्रह नरक का कारण आर्यिका विज्ञा श्री

धर्म

आरंभ परिग्रह नरक का कारण आर्यिका विज्ञा श्री
निवाई
श्री शांतिनाथ दिगम्बर अग्रवाल जैन मंदिर निवाई में प्रातः अभिषेक, शांति धारा,बाद अष्टद्रव्यों से पूजा हुई जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजा बाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि
जिस प्रकार पतंगबाज पतंग उलझने पर उसे खींचता जाता है फिर बाद में डोर तोड़ देता है पतंग चली जाती है घागा तो बचा रहता है इसी प्रकार व्रतियों को अपने आरंभ परिग्रह समेटते रहना चाहियें अर्थात कम करते रहना चाहिये फिर छोड़ देना चाहियें तब धर्म बचेगा अधिक आरंभ परिग्रह जोड़ने से नरक रूपी दुखो की प्राप्ति होती हैं एवं इसका त्याग करने से स्वर्ग मोक्ष की प्राप्ति होती हैं गोधा ने अवगत कराया कि आगामी 31 अगस्त से 9 सितंबर तक तप, त्याग, संयम का पर्व पर्युषण पर श्रावक संस्कार साधना शिविर का आयोजन किया जाएगा और 31 अगस्त को श्री जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान का विश्वशांति महायज्ञ के साथ समापन होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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