अपने आप को जानने के लिए बहुत कुछ जानना होगा विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि धर्म का मतलब एकाग्र होना होता है एकाग्रता का मतलब होता है सुकून पाना ऐसे सुख की चाह करनी चाहिए जो स्थाई हो।
उन्होंने इंद्रिय सुख और अतीन्द्रिय सुख के विषय में बताया इंद्रिय सुख का मतलब पांचों इंद्रिय और मन से होना वाला सुख जिसका आनंद आप आज तक ले रहे है।अतीन्द्रिय सुख का मतलब होता है की इंद्रियो का कोई रोल नहीं है आत्मा से ही आत्मा में सुख उत्पन्न होता है। पर का कोई रोल नहीं है ऐसा सुख स्थाई और नित्य होता है।

शुक्ल ध्यान को समझाते हुए गुरुदेव ने किया शुक्ल ध्यान का मतलब होता है परिणामों में निर्मलता कोई गरीब नहीं भाव सुख की अनुभूति होती है। यही शुक्ल ध्यान है। यह पंचम काल में नहीं होता है इसके लिए मन को एकाग्र होना चाहिए वर्तमान में यह योग्यता मनुष्य में नहीं है निर्मल ध्यान पंचम काल में नहीं होता।

हम बहुत सारी चीजों को दिन भर में समझते हैं लेकिन एक चीज समझ में नहीं आती स्वयं को हम समझ नहीं पाते जीव की सबसे बड़ी भूल है सबको समझ लेता है लेकिन अपने आपको नहीं समझता सबसे पहले अपने आपको समझना चाहिए
उन्होंने कहा कि हम दूसरों को समझते हैं तो लौकिक लाभ और लौकिक हानि हो सकती है लेकिन आध्यात्मिक हानि नियम से होती है। अगर अपने आप को समझते हैं तो लौकिक हानि तो होगी लेकिन आध्यात्मिक लाभ जरूर होगा। जब तक पर पदार्थ में आसक्ति रहेगी तब तक आप नरक से नहीं बच सकते जब पर पदार्थ से आसक्ति हटेगी तब जाकर नरक गति से बच सकते हैं।
आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य कमाना आसान नहीं दुर्गति से बचना आसान नहीं कठिन इसलिए है कि हमने पर की सोच को बना रखा है और पर में ही सब कुछ अपने आप को मान रहे हैं। दुनिया दूसरों की है अपनी नहीं। हम दूसरे की दुनिया में आनंद मान रहे हैं। स्वयं की प्राप्ति करनी होगी अपने आप को जानने के लिए बहुत कुछ जानना होगा।
संसार की शक्ति का प्रयोग अच्छाई के लिए हो। खुद की उंगली पकड़ो अपनी उंगली पकड़कर अपने आप को चलना होगा क्रोध मान माया लोभ आया तो मन वचन काया विकृत होगी। मन वचन काया की प्रवृत्ति क्रोध मान माया लोभ करेगी तो परिणाम विकृति खराब होगी। विज्ञान भी मानता है कि हाथ में तलवार लिए व्यक्ति का ओरा काला होगा और खराब होगा। अच्छा नहीं होगा। हाथों में फूल लिए व्यक्ति का ओरा श्वेत धवल होगा शुभ होगा यह विज्ञान भी मानता है। आगम कहता है आप रंगीन हो गिरगिट तो तीन कलर बदलता है लेकिन आप छह कलर बदलते हो।
श्रोताओं को देखकर वक्ता की शब्दकोष की किताबें खुलती हैं
महाराज श्री ने कहा की प्रवचन सुनने में और सुनाने में आनंद तब आता है जब पहले आप आए फिर हम आए श्रोताओं को देखकर वक्ता की शब्दकोष की किताबें खुलती हैं मरे से श्रोता हो चेहरे पर कोई विक्रिया ना हो तो सारे शब्दकोष की किताब में बंद हो जाती हैं। आपके उत्साह से बोलने वाले का उत्साह बढ़ता है। उन्होंने मुस्कुराहट देते हुए कहा कि मुस्कुराना सीखो रामगंज मंडी वालों को मुस्कुराना नहीं आता हम लोगों को देखकर मुस्कुराओ
कीमत उस चीज की है कि शुरू कब करेंगे और अशुभ से कब रुकेंगे, शुभ कब करेंगे यह बाते नहीं है तो हम कुछ हासिल भी नहीं कर सकते।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

