मुनि श्री प्रज्ञान सागर महाराज संघ सानिध्य में भव्य जैन दंपति सेमिनार संपन्न 

धर्म

मुनि श्री प्रज्ञान सागर महाराज संघ सानिध्य में भव्य जैन दंपति सेमिनार संपन्न 

टोंक 

श्री दिगंबर जैन नसिया अमीरगंज टोंक में रविवार को आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रज्ञान सागर जी महाराज एवं मुनि श्री प्रसिद्ध सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में एक भव्य जैन दंपति सेमिनार का आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।

समाज के प्रवक्ता पवन कंटान और गुरु भक्त कमल सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत चित्र अनावरण एवं दीपप्रज्वलन अनिल आंडरा, धर्मचंद पत्तलदोना,राजेश बोरदा , ज्ञानचंददाखिया , अनिल सर्राफ अभिषेक बिलासपुरिया ने किया।

शास्त्र भेटधर्मेंद्र पासरोटियां पवन कंटान अंकुर पाटनी ओम ककोड़ कमल सर्राफ राजेश शिवाडिया डॉ चेतन जैन ने किया मंगलाचरण राजकुमारी अत्तर बीना जैन अनीता जैन ने किया इस अवसर पर 120 दाम्पत्य जोड़े को मुनि श्रीप्रज्ञान सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में दांपत्य जीवन, पारिवारिक समरसता एवं संस्कारों पर अत्यंत सारगर्भित मार्गदर्शन प्रदान किया।

 

मुनि श्री ने बताया कि पति–पत्नी का संबंध केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों, समर्पण और समझदारी का होता है। एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान, संवाद में मधुरता और परस्पर विश्वास ही सुखी गृहस्थ जीवन की नींव है। क्रोध, अहंकार और शंका को त्यागकर क्षमा, संयम और सहनशीलता को अपनाने से घर स्वर्ग बन सकता है।

 

 

 

 

सास–बहू में कैसे हो सामंजस्य

उन्होंने विशेष रूप से सास–बहू संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सास को बहू को बेटी समान अपनाना चाहिए और बहू को सास में माँ का भाव देखना चाहिए। आलोचना के स्थान पर सहयोग, आदेश के स्थान पर स्नेह और अपेक्षा के स्थान पर समझ विकसित करने से परिवार में सौहार्द बना रहता है। छोटी-छोटी बातों को तूल न देकर धैर्य और संवाद से समाधान निकालना चाहिए।

 

 

 

घर में शांति और संस्कार कैसे बनें

मुनि श्री ने कहा कि घर केवल ईंट–पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला है। परिवार में प्रतिदिन कुछ समय धर्म चर्चा, स्वाध्याय, भक्ति और आपसी संवाद के लिए अवश्य निकालना चाहिए। बच्चों के सामने माता–पिता का आचरण ही उनका पहला उपदेश होता है, इसलिए अपने व्यवहार को संयमित और आदर्श बनाना आवश्यक है।

 

 

जैन दर्शन का महत्व

उन्होंने जैन दर्शन के मूल सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांत—को पारिवारिक जीवन में उतारने का आह्वान किया। इन सिद्धांतों को अपनाकर ही दंपति जीवन को शांत, सुसंस्कृत और धर्ममय बनाया जा सकता है।

 

 

 

इस मौके पर दंपतियों ने महाराज से अपनी शंकाओ का समाधान किया सेमिनार के अंत में उपस्थित जैन दंपतियों ने मुनि श्री के मार्गदर्शन को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। यह सेमिनार न केवल दांपत्य जीवन के लिए, बल्कि समग्र पारिवारिक और सामाजिक उत्थान के लिए अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

इस मौके पर समाज के अनिल सर्राफ मनीष फागी जितेंद्र बनेठा पप्पू नमक मनोज जी बनेठा अभिषेक बिलासपुरिया रमेश काला, रमेश हाडी गांव आदि लोग उपस्थित थे अंत में समाज के अध्यक्ष पदमचंद आंध्र एवं मंत्री महावीर प्रसाद देवली ने सबका आभार एवं सम्मान व्यक्त किया

इसके बाद समापन के कार्यक्रम आयोजित हुआ।

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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