मृत्यु के आगे विज्ञान तंत्र और मंत्र सभी निष्प्रभ मुनि श्री निर्भीक सागर महाराज गुना समाज की की सराहना
गुना
चौधरी मोहल्ला स्थित महावीर भवन में मंगल उद्बोधन देते हुए मुनि श्री 108 निर्भीक सागर महाराज ने गूढ़ आध्यात्मिक विषयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मृत्यु एक सुनिश्चित सत्य है जिसे न तो विज्ञान, न ज्योतिष, न ही तंत्र मंत्र या कोई महामंत्र टाल सकता है।
उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े वैज्ञानिकों ने आत्मा और मृत्यु को रोकने के लिए वर्षों तक प्रयोग किए, यहां तक की अंतिम सांसें गिन रहे व्यक्तियों को कांच की पेटी में बंद कर दिया, लेकिन मृत्यु के आगे सारे प्रयास व्यर्थ साबित हुए। महाभारत में भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान था तब तक जीवित रहे जब तक उनका आयु कम शेष था।
उन्होंने कहा तिर्यच और मनुष्य गति में अकाल मरण संभव है। लेकिन देवगति और नरक गति में यह नहीं होता। महाराज श्री ने स्पष्ट करते हुए कहा कि औषधि तभी कारगर होती है, जब आयु कम शेष हो, वह आयु कर्म नहीं बढ़ा सकती। किसी भी तंत्र मंत्र या महामृत्युंजय महामंत्र से मृत्यु को नहीं टाला जा सकता। 
महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि मुनिराजो की दीक्षा होते ही उनका संलेखना व्रत प्रारंभ हो जाता है। उनका अंतिम क्षण भी णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठी और ओम शब्द के साथ शांत और साधनामय होता है। उन्होंने कहा कि ओम शब्द में पांचो परमेष्ठीयो की शक्ति समाहित है और यही मंत्र हमें मोक्ष की ओर ले जाता है।
महाराज श्री ने गुना समाज की सराहना करते हुए कहा कि गत वर्ष चातुर्मास के दौरान मुनि श्री निर्दोष सागर जी, निर्लोभ सागर जी और निरुपम सागर जी महाराज के सानिध्य में जाप मशीन से करोड़ों बार णमोकार मंत्र का स्मरण किया। यह जाप हमें अशुभ कर्मों से शुभ कर्मों की ओर ले जाता है। ऐसे महामंत्र का जाप प्रतिक्षण स्मरण जीवन को शुद्ध और उन्नत बनाता है।
प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने विद्यार्थियों और शिक्षार्थियों को भी मार्गदर्शन दिया। महाराज श्री ने कहा कि जो विद्या चाहता है वह सच्चा विद्यार्थी है। सुख और विलास की कामना रखने वाला कभी सच्चा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकता।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

