श्री कैलाश रवि सचमुच रवि थे

धर्म

श्री कैलाश रवि सचमुच रवि थे
बहुत कम व्यक्तित्त्व होते अपने नाम को सार्थक कर पाते है है ऐसे ही एक व्यक्तित्त्व हुए श्री कैलाश रवि जो भवानीमंडी जो सचमुच रवि के समान उदितमान थे और में भी जाग्रति का संदेश देते थे। मंचो का कुशल संचालन करना।इनके व्यक्तित्व को दर्शाता था। साथ ही अस्वस्थ रहने के बाद आपका मनोबल साहस अदभुत था। इतना ही नही। इन्होंने सम्मेद शिखर जी की 171 वंदना की। साथ ही कई जिनवाणी स्तुतियों व भजनों की रचना आपके द्वारा की गई। जो आज भी लोगो की जुबा पर है। आपकी पहचान एक आशु कवि के रूप में भी रही। आप परम मुनिभक्त योगाचार्य भी रहे। आपकी कर्मण्यता सदा चिरस्थायी रहेगी। वही सँस्कार उन्होंने अपने परिवार को दिये। जो उनके पुत्र अविनाश व आलोक में देखे जा सकते है।
अंत समय मे भी दे गए दो नेत्रहीनो को ज्योति दी  रवि ने
श्री कैलाश रवि की नेत्रों से अब दो नेत्रहीनो को मिलेगी नई नेत्रज्योति मिलेगी सचमुच यह आँखे ईश्वर का दिया हुआ सबसे खूबसूरत उपहार है। और किसी को नई नेत्रज्योति प्रदान करना परोपकार का सबसे बड़ा माध्यम है यही कारण है कि नेत्रदान सर्वश्रेष्ठ दान माना जाता है, वैसा ही श्री रवि ने किया।
राजकीय चिकित्सालय के सामने रहने वाले कैलाश जैन ‘रवि’ की हृदयाघात से मृत्यु होने के पश्चात पुत्र अविनाश जैन और आलोक जैन ने स्वयं पहल करके पिताजी का नेत्रदान करने का निर्णय लिया। और भारत विकास परिषद के प्रांतीय नेत्रदान प्रभारी कमलेश दलाल के द्वारा शाइन इंडिया फाउंडेशन को सूचना देने पर वहां से शाइन इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं आई बैंक सोसाइटी ऑफ राजस्थान के प्रभारी डॉ कुलवंत गौड ने प्रातः 10 बजे कोटा से कार से भवानीमंडी आकर नेत्रदान प्राप्त किया। घर पर सभी परिजनों, रिश्तेदारों एवं समाज सदस्यों के मध्य नेत्रदान संपन्न हुआ, महिलाओं सहित उपस्थित सभी लोगों ने नेत्रदान की प्रक्रिया को देखा और जाना की नेत्रदान में किसी भी तरह की चेहरे पर विकृति नहीं आती है, इसमें केवल आंखों के ऊपर की झिल्ली जिसे कोर्निया कहा जाता है को ही लिया जाता है, इसमें पूरी आंख नहीं निकाली जाती है, यह प्रक्रिया 10 मिनट में ही पूरी हो गई।
इनका कॉर्निया अच्छा पाया गया
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड ने बताया कि कैलाश रवि का कोर्निया अच्छा पाया गया है, जिसे आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है जहां यह दो असहाय नेत्रहीनों को नई रोशनी प्रदान कर सकेगा।
श्री कमलेश दलाल ने श्री रवि के व्यक्तित्व के बारे में बताया
भारत विकास परिषद के प्रांतीय नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र कमलेश दलाल ने बताया कि भवानीमंडी में योगाचार्य के नाम से प्रसिद्ध कैलाश रवि कवि होने के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों में सदैव अग्रणी रहते थे, आपके द्वारा श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थ की 171 यात्रा पूरी की जा चुकी है, लगातार जैन साधुओं के कृपा पात्र होने से आप परोपकारी जीवन ओर प्रेरित रहे, और आपने पूर्व में ही अपने नेत्रदान का संकल्प लिया हुआ था, कैलाश रवि के सुपुत्र अविनाश जैन भवानीमंडी राजकीय चिकित्सालय सीनियर नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, एवं द्वितीय पुत्र आलोक जैन मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं अतः आप नेत्रदान की महत्वता को समझते हैं और इसीलिए नेत्रदान की पहल स्वयं परिवार की ओर से की गई, एवं नेत्रदान प्रक्रिया के समय भी दोनों पुत्र अविनाश जैन और आलोक जैन ने नेत्रदान प्रक्रिया को सम्पन्न कराने में सहयोग दिया। कैलाश रवि के साथ साथ अन्य परिवार सदस्यों ने भी नेत्रदान का संकल्प लिया हुआ है।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *