वात्सल्य पूर्णिमा धर्म, धर्मात्मा और जिन मंदिरों की रक्षा का संदेश देता है। राखी रक्षा का प्रतीक हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पारसोला।

पंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी पारसोला में संघ सहित विराजित है आचार्य संघ के सानिध्य में अकंपनाचार्य विष्णु मुनिराज सहित 700 मुनिराज का पूजन किया गया और 1008 श्री श्रेयास नाथ भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस अवसर पर धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि 700 मुनिराज पर हस्तिनापुर में उपसर्ग हुआ था यह कथा रक्षाबंधन से संबंधित नहीं है आज के दिन बंधन से मुक्त होने का दिवस है संसार बंधन से हर जीव मुक्त होना चाहता है 11वें तीर्थंकर श्री श्रेयासनाथ भगवान ने वात्सल्य पूर्णिमा आज के दिन निर्वाण मोक्ष को पुरुषार्थ से प्राप्त किया। निर्वाण प्राप्त करने के लिए सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान सम्यकचारित्र रत्नत्रय मार्ग जरूरी है। सम्यक दर्शन होना जरूरी है सम्यक दर्शन के आठ गुण होते हैं किंतु वात्सल्य गुण सबसे बड़ा है प्राणी मात्र के प्रति वात्सल्य का संदेश देता है। आचार्य श्री ने उज्जैनी नगरी की कथा के माध्यम से बताया कि अकंपनाचार्य आचार्य सहित 700 मुनिराज पर हस्तिनापुर में राजा बलि ने उपसर्ग किया था तब विक्रिया रिद्धि के माध्यम से महामुनि विष्णु कुमार ने उपसर्ग को दूर किया था और वह उपसर्ग रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिवस दूर हुआ इसी कारण इस रक्षाबंधन पर्व को वात्सल्य पूर्णिमा भी कहा जाता है । राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने एक अन्य कथा के माध्यम से बताया कि चित्तौड़ की रानी पद्मिनी पर जब शत्रु ने हमला बोला तब उन्होंने हुमायूं राजा के पास राखी भेजी थी तब राजा हूमायू ने रानी पद्मिनी की रक्षा राज्य सहित की। उस दिन को रक्षाबंधन पर्व माना जाता है। राखी रक्षा का प्रतीक है भाई बहन के साथ धर्म धर्मात्मा और संस्कृति की रक्षा करना सबका कर्तव्य है।



20वीं सदी में आचार्य शांति सागर जी महाराज पर भी राजा खेड़ा में उपसर्ग हुआ था आचार्य श्री ने जैन धर्म की दृष्टि से एक और कथानक के माध्यम से बताया कि जैन मंदिरों में विजातीय प्रवेश के विरोध में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया था कोर्ट का फैसला जैन समाज के पक्ष में आने के बाद उन्होंने अन्न आहार आज के ही रक्षाबंधन के दिन ग्रहण किया था।
आचार्य श्री ने बताया कि लाडनूं राजस्थान के गंगवाल परिवार ने आचार्य श्री के उपवास के कारण तन मन धन से अपनी पूरी संपत्ति धर्म युद्ध के लिए समर्पित कर दी राखी का त्योहार धर्म धर्मात्मा , संस्कृति जिनालय की रक्षा का संकल्प लेने से पूर्ण होगा।
जयंतीलाल कोठारी एवं ऋषभ पचौरी ने बताया कि इसके पूर्व विधान का आयोजन किया गया जिस पर आठ चक्रवर्ती द्वारा 700 700 नारियल विधान पर कुल 5600 श्रीफल चढ़ाए गए आचार्य श्री की पीछी पर भाग्यशाली परिवार द्वारा राखी बांधी गई। पूर्वाचार्य के चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य पुण्यशाली परिवार को प्राप्त हुआ।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312 
