आचार्य श्री ने 9 दिन निर्जल उपवास किया रिकॉर्ड बनाने नहीं आत्मबल की पहचान विमल सागर महाराज
सागर
मुक्तगिरि जैन तीर्थ क्षेत्र पर आचार्य श्री विद्यासागर ने 9 दिन तक लगातार निर्जला उपवास किए दसवे दिन जब वह आहार पर निकले तो संघ मुनियों ने उनसे पूछा क्या यह उपवास किसी रिकॉर्ड के लिए किया गया? इसका उत्तर आचार्य श्री ने दिया और कहा रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं, आत्म बल बढ़ाने के लिए तप किया है। यह बात मुनि श्री विमल सागर महाराज ने रविवार को भाग्योदय तीर्थ में सिद्ध चक्र महामंडल विधान में प्रवचन के अंतर्गत कहीं।
उन्होंने कहा सिद्ध नहीं बन सकते सिद्धों की आराधना करो। 9 महीने मां के गर्भ में अंधकार में रहे, अब 24 घंटे अधेरे में नहीं रह सकते। अपनी शक्ति को पहचानो। हमारे अंदर अनंत गुण हैं। भवसागर से पार होना है तो तप और साधना जरूरी है।
उन्होंने तपस्वी संत मुनिश्री 108 चंद्रप्रभ सागर महाराज के विषय में कहा कि वे दीक्षा से अब तक एक आहार एक उपवास कर रहे हैं। भक्ति से शक्ति बढ़ती है। धर्म करने से जीवन में आनंद आता है।
एक बार सर्वोतोभद्र जिनालय बनाकर देखो, मंदिर में बैठने का सौभाग्य मिलेगा। आचार्य श्री ने अपना पूरा जीवन धर्म को समर्पित किया है। जितनी उनके प्रभावना होगी उतना ही हम आनंदित होगे। आचार्य श्री चतुर्थकालीन साधु है। उन्होंने पहले दीक्षा आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को दी थी। उनकी चर्या भी चतुर्थ कालीन साधु जैसी है। सभी को अपने गुरु के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए।
मुनि श्री ने सभी सागरवासियों से कहा कि रोज सोने से पहले भावना करें कि आचार्य श्री समय सागर महाराज शीघ्र सागर आए और सर्वोतोभद्र जिनालय का निर्माण कार्य पूर्ण हो। पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव में भाग लेने का सौभाग्य मिले। आपकी भावना जरूर पूरी होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312









