आज का इंसान दोहरी जिंदगी जी रहा है विज्ञमति माताजी

धर्म

आज का इंसान दोहरी जिंदगी जी रहा है विज्ञमति माताजी

ग्वालियर

परम पूज्या गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी की परम प्रभाविका शिष्या पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने अपने मंगल उद्बोधन मे अहंकार के विषय पर प्रकाश  डाला उन्होने जब सोच  धरातल से ऊँची उठने लगती है तब ज्ञान का अहंकार हो जाता है तब मंजिल भी दूर हो जाती है रविवार की बेला मे चम्पाबाग़ धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित कर रही थी उन्होने कहा आज का इन्सान दोहरी जिंदगी को जी रहा है उन्होने सीख देते हुए कहा की कुछ लोग अपने आप को ज्ञानी समझते है लेकिन जो भी व्यक्ति गलतफहमी मे होता है वह व्यक्ति कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुचता और न ही पहुच पाता है कम ज्ञान हमेशा खतरनाक ही होता है

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *